सब प्रकार भूपति बड़भागी । बादि बिषाद करिय तेहि लागी ॥
यह सुनि समुझि सोच परिहरहू । सिर धरि राज-रजायसु करहू ॥
saba prakāra bhūpati bar̤abhāgī | bādi biṣāda kariya tehi lāgī ||
yaha suni samujhi soca pariharahū | sira dhari rāja-rajāyasu karahū ||
5 श्लोक · 174 में से 326
वसिष्ठ कहते हैं, राजा सब प्रकार बड़भागी थे, उनके लिए विषाद व्यर्थ है। सोच छोड़ो और राजा की आज्ञा सिर पर रखो। राजा ने राजपद तुम्हें दिया है, पिता का वचन सच करना चाहिए। जिस वचन के लिए उन्होंने राम को त्यागा और राम के विरह की आग में देह छोड़ी, वह वचन उन्हें प्राणों से भी प्रिय था। बेटा, उसे प्रमाण करो, इसी में तुम्हारी भलाई है। परशुराम ने पिता की आज्ञा से माता को मारा, सारा लोक साक्षी है। ययाति के पुत्र ने पिता को अपना यौवन दे दिया। दोनों को न पाप लगा न अपयश। जो उचित अनुचित का विचार छोड़कर पिता का वचन पालते हैं, वे सुख और सुयश पाकर इन्द्रलोक में बसते हैं।
सब प्रकार भूपति बड़भागी । बादि बिषाद करिय तेहि लागी ॥
यह सुनि समुझि सोच परिहरहू । सिर धरि राज-रजायसु करहू ॥
saba prakāra bhūpati bar̤abhāgī | bādi biṣāda kariya tehi lāgī ||
yaha suni samujhi soca pariharahū | sira dhari rāja-rajāyasu karahū ||
राँय राजपदु तुम्ह कहूँ दीन्हा । पिता-बचन फुर चाहिय कीन्हा ॥
तजे राम जेहिं बचनहि लागी । तनु परिहरेउ राम-बिरहागी ॥
rām̐ya rājapadu tumha kahūm̐ dīnhā | pitā-bacana phura cāhiya kīnhā ||
taje rāma jehiṃ bacanahi lāgī | tanu parihareu rāma-birahāgī ||
नृपहि बचन-प्रिय नहिँ प्रिय प्राना । करहु तात पितु-बचन प्रवाना ॥
करहु सीस धरि भूप-रजाई । हइ तुम्ह कहँ सब भाँति भलाई ॥
nṛpahi bacana-priya nahim̐ priya prānā | karahu tāta pitu-bacana pravānā ||
karahu sīsa dhari bhūpa-rajāī | hai tumha kaham̐ saba bhām̐ti bhalāī ||
परसुराम पितु अज्ञा राखी । मारी मातु लोक सब साखी ॥
तनय जजातिहि जौबनु दयऊ । पितु-अज्ञा अघ-अजस न भयऊ ॥
parasurāma pitu ajñā rākhī | mārī mātu loka saba sākhī ||
tanaya jajātihi jaubanu dayaū | pitu-ajñā agha-ajasa na bhayaū ||
अनुचित उचित विचार तजि, जे पालहिं पितु बैन ।
ते भाजन सुख-सुजस के, बसहिँ अमरपति-अयन ॥
anucita ucita vicāra taji, je pālahiṃ pitu baina |
te bhājana sukha-sujasa ke, basahim̐ amarapati-ayana ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0