अयोध्याकाण्ड

अध्याय 173: दशरथ जैसा राजा न हुआ न होगा

5 श्लोक · 173 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

दशरथ जैसा राजा न हुआ न होगा

वसिष्ठ अपनी सूची पूरी करते हैं। सोच उस वानप्रस्थ का करो जिसे तप छोड़कर भोग भाता है, उस चुगलखोर का जो बिना कारण क्रोध करता है, और उसका जो माता, पिता, गुरु और भाई का विरोधी है। सबसे अधिक सोच उसका करो जो दूसरों का अहित करता है, केवल अपना शरीर पालता है और निर्दयी है, और उसका जो हरि के भक्तों से छल नहीं छोड़ता। पर कोसलराज सोच के योग्य नहीं। उनका प्रभाव चौदहों भुवनों में प्रकट है। भरत, तुम्हारे पिता जैसा राजा न हुआ, न है, न आगे होगा। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र और दिक्पाल सब दशरथ के गुण गाते हैं। बेटा, बताओ, जिसके राम, लक्ष्मण, तुम और शत्रुघ्न जैसे पवित्र पुत्र हों, उसकी बड़ाई कोई कैसे कर सकता है?

173.1

बैषानस सोइ सोचै जोगु । तप बिहाइ जेहि भावइ भोगू ॥
सोचिअ पिसुन अकारन-क्रोधी । जननि जनक गुर बन्धु बिरोधी ॥

baiṣānasa soi socai jogu | tapa bihāi jehi bhāvai bhogū ||
socia pisuna akārana-krodhī | janani janaka gura bandhu birodhī ||

173.2

सब बिधि सोचिअ पर-अपकारी । निज-तनु-पोषक निरदय भारी ॥
सोचनीय सबही विधि सोई । जो न छाडि छल हरिजन हाई ॥

saba bidhi socia para-apakārī | nija-tanu-poṣaka niradaya bhārī ||
socanīya sabahī vidhi soī | jo na chāḍi chala harijana hāī ||

173.3

सोचनीय नहिँ कोसलराऊ । भुवन चारि दस प्रगट प्रभाऊ ॥
भयउ न अहइ न अब होनिहारा । भूप भरत जस पिता तुम्हारा ॥

socanīya nahim̐ kosalarāū | bhuvana cāri dasa pragaṭa prabhāū ||
bhayau na ahai na aba honihārā | bhūpa bharata jasa pitā tumhārā ||

173.4

बिधि हरि हरु सुरपति दिसिनाथा । बरनहिँ सब दसरथ गुन-गाथा ॥

bidhi hari haru surapati disināthā | baranahim̐ saba dasaratha guna-gāthā ||

दो॰ 173दोहा

कहहु तात केहि भाँति कोउ, करिहि बड़ाई तासु ।
राम लखन तुम्ह सत्रुहन, सरिस सुअन सुचि जासु ॥

kahahu tāta kehi bhām̐ti kou, karihi bar̤āī tāsu |
rāma lakhana tumha satruhana, sarisa suana suci jāsu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0