अयोध्याकाण्ड

अध्याय 172: सोच किसका करना चाहिए

5 श्लोक · 172 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सोच किसका करना चाहिए

वसिष्ठ कहते हैं, किसे दोष दें और किस पर व्यर्थ क्रोध करें? राजा दशरथ सोच करने योग्य नहीं हैं। फिर मुनि बताते हैं कि सोच किसका करना चाहिए। उस ब्राह्मण का, जो वेद से रहित होकर विषयों में लीन है। उस राजा का, जो नीति नहीं जानता और जिसे प्रजा प्राणों सी प्रिय नहीं। उस धनी वैश्य का, जो कंजूस है और अतिथि तथा शिव को नहीं पूजता। उस शूद्र का, जो ब्राह्मणों का अपमान करता है और ज्ञान का घमंड रखता है। उस स्त्री का, जो पति से छल करती है। उस ब्रह्मचारी का, जो गुरु की आज्ञा नहीं मानता। उस गृहस्थ का, जो मोहवश कर्म मार्ग छोड़ दे, और उस संन्यासी का, जो प्रपंच में रत और विवेक वैराग्य से रहित हो।

172.1

अस बिचारि केहि देइअ दोसू । व्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू ॥
तात बिचार केहि करहु मन माहीं । सोच जोग दशरथ-नृपु नाहीं ॥

asa bicāri kehi deia dosū | vyaratha kāhi para kījia rosū ||
tāta bicāra kehi karahu mana māhīṃ | soca joga daśaratha-nṛpu nāhīṃ ||

172.2

सोचिअ विप्र जो बेद-बिहीना । तजि निज-धरम विषय लयलीना ॥
सोचिअ नृपति जो नीति न जाना । सोचिय नृपति जो नीति न प्रजा प्रिय प्रान समाना ॥

socia vipra jo beda-bihīnā | taji nija-dharama viṣaya layalīnā ||
socia nṛpati jo nīti na jānā | sociya nṛpati jo nīti na prajā priya prāna samānā ||

172.3

सोचिअ बयस कृपन धनवानू । जो न अतिथि-सिव-भगति सुजानू ॥
सोचिअ सूद्रु विप्र अवमानी । मुखर मान-प्रिय ज्ञान-गुमानी ॥

socia bayasa kṛpana dhanavānū | jo na atithi-siva-bhagati sujānū ||
socia sūdru vipra avamānī | mukhara māna-priya jñāna-gumānī ||

172.4

सोचिअ पुनि पति-बञ्चक नारी । कुटिल कलह-प्रिय इच्छा चारी ॥
सोचिअ बटु निज-ब्रतु परिहरई । जो नहिं गुरु आयसु अनुसरई ॥

socia puni pati-bañcaka nārī | kuṭila kalaha-priya icchā cārī ||
socia baṭu nija-bratu pariharaī | jo nahiṃ guru āyasu anusaraī ||

दो॰ 172दोहा

सोचिय गृही जो मोह बस, करइ करम-पथ त्याग ।
सोचिअ जती प्रपञ्च-रत, बिगत बिबेक-बिराग ॥

sociya gṛhī jo moha basa, karai karama-patha tyāga |
socia jatī prapañca-rata, bigata bibeka-birāga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0