तात बात मैं सकल सँवारी । भइ मन्थरा सहाय बिचारी ॥
कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ । भूपति सुरपति-पुर पगु धारेउ ॥
tāta bāta maiṃ sakala sam̐vārī | bhai mantharā sahāya bicārī ||
kachuka kāja bidhi bīca bigāreu | bhūpati surapati-pura pagu dhāreu ||
5 श्लोक · 160 में से 326
कैकेयी कहती है, बेटा, मैंने सारी बात बना ली थी, बेचारी मन्थरा सहायक हुई, पर विधाता ने बीच में कुछ काम बिगाड़ दिया: राजा इन्द्रलोक को चले गए। सुनते ही भरत ऐसे सहम गए जैसे सिंह की गर्जना से हाथी। तात, हा तात पुकारते हुए वे धरती पर गिर पड़े: चलते समय मैं आपको देख भी न सका, और आपने मुझे राम को सौंपा भी नहीं। फिर सँभलकर पूछा, माता, पिता की मृत्यु का कारण कहो। पुत्र के वचन सुनकर कैकेयी ऐसे कहती है मानो मर्मस्थान को चीरकर उसमें विष भर रही हो; वह प्रसन्न मन से अपनी सारी कुटिल करनी कह सुनाती है। दोहे में राम का वनगमन सुनकर भरत पिता की मृत्यु भी भूल गए; अपने को ही कारण जानकर वे मौन होकर स्तब्ध रह गए।
तात बात मैं सकल सँवारी । भइ मन्थरा सहाय बिचारी ॥
कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ । भूपति सुरपति-पुर पगु धारेउ ॥
tāta bāta maiṃ sakala sam̐vārī | bhai mantharā sahāya bicārī ||
kachuka kāja bidhi bīca bigāreu | bhūpati surapati-pura pagu dhāreu ||
सुनत भरत भये बिबस बिषादा । जनु सहमेउ करि केहरि नादा ॥
तात तात हा तात पुकारी । परे भूमितल ब्याकुल भारी ॥
sunata bharata bhaye bibasa biṣādā | janu sahameu kari kehari nādā ||
tāta tāta hā tāta pukārī | pare bhūmitala byākula bhārī ||
चलत न देखन पायउँ तोही । तात न रामहि सौंपेहु मोही ॥
बहुरि धीर धरि उठे सँभारी । कहु पितु मरन हेतु महतारी ॥
calata na dekhana pāyaum̐ tohī | tāta na rāmahi sauṃpehu mohī ||
bahuri dhīra dhari uṭhe sam̐bhārī | kahu pitu marana hetu mahatārī ||
सुनि सुत बचन कहति कैकेई । मरम पाँछि जनु माहुर देई ॥
आदिहु तेँ सब आपनि करनी । कुटिल कठोर मुदित मन बरनी ॥
suni suta bacana kahati kaikeī | marama pām̐chi janu māhura deī ||
ādihu tem̐ saba āpani karanī | kuṭila kaṭhora mudita mana baranī ||
भरतहि बिसरेउ पितु-मरन, सुनत राम-बन-गौन ।
हेतु अपनपउ जानि जियँ, थकित रहे धरि मौन ॥
bharatahi bisareu pitu-marana, sunata rāma-bana-gauna |
hetu apanapau jāni jiyam̐, thakita rahe dhari mauna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0