एकहिं बार आस सब पूजी । अब कछु कहब जीभ करि दूजी ॥
फोरै जोग कपार अभागा । भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा ॥
ekahiṃ bāra āsa saba pūjī | aba kachu kahaba jībha kari dūjī ||
phorai joga kapāra abhāgā | bhaleu kahata dukha raurehi lāgā ||
5 श्लोक · 16 में से 326
मन्थरा आहत सेविका का स्वाँग करती है। बोली, एक ही बार में सारी आशाएँ पूरी हो गईं, अब क्या दूसरी जीभ लगाकर कुछ कहूँ? मेरा अभागा कपाल फोड़ने योग्य है, भला कहने पर भी तुम्हें दुःख लगता है। जो झूठ को सच बनाकर कहते हैं, वे तुम्हें प्यारे हैं और मैं कड़वी हूँ। अब मैं भी मुँह देखी कहूँगी, नहीं तो चुप रहूँगी। विधाता ने कुरूप और पराधीन बनाया, जो बोया सो काटती हूँ। कोई भी राजा हो, मेरी क्या हानि? क्या दासी से रानी बन जाऊँगी? मेरा स्वभाव जलाने योग्य है कि तुम्हारा अहित देखा नहीं जाता। देवी, भूल क्षमा करो। गूढ़ कपट भरे प्रिय वचन सुनकर, देवमाया के वश रानी ने बैरिन को हितैषी मानकर विश्वास कर लिया।
एकहिं बार आस सब पूजी । अब कछु कहब जीभ करि दूजी ॥
फोरै जोग कपार अभागा । भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा ॥
ekahiṃ bāra āsa saba pūjī | aba kachu kahaba jībha kari dūjī ||
phorai joga kapāra abhāgā | bhaleu kahata dukha raurehi lāgā ||
कहहिँ झूठि फुरि बात बनाई । ते प्रिय तुम्हहिँ करुइ मैं माई ॥
हमहुँ कहब अब ठकुरसोहाती । नाहिं त मौन रहब दिन राती ॥
kahahim̐ jhūṭhi phuri bāta banāī | te priya tumhahim̐ karui maiṃ māī ||
hamahum̐ kahaba aba ṭhakurasohātī | nāhiṃ ta mauna rahaba dina rātī ||
करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा । बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा ॥
कोउ नृप होउ हमहिँ का हानी । चेरि छाड़ि अब होब कि रानी ॥
kari kurūpa bidhi parabasa kīnhā | bavā so lunia lahia jo dīnhā ||
kou nṛpa hou hamahim̐ kā hānī | ceri chār̤i aba hoba ki rānī ||
जारै जोग सुभाउ हमारा । अनभल देखि न जाइ तुम्हारा ॥
ता तेँ कछुक बात अनुसारी । छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी ॥
jārai joga subhāu hamārā | anabhala dekhi na jāi tumhārā ||
tā tem̐ kachuka bāta anusārī | chamia debi bar̤i cūka hamārī ||
गूढ़-कपट प्रिय-बचन सुनि, तीय-अधर-बुधि रानि ।
सुर-माया-बस बैरिनिहि, सुहृद जानि पतिआनि ॥
gūr̤ha-kapaṭa priya-bacana suni, tīya-adhara-budhi rāni |
sura-māyā-basa bairinihi, suhṛda jāni patiāni ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0