प्रान कंठगत भयउ भुआलू । मनि-बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू ॥
इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी । जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी ॥
prāna kaṃṭhagata bhayau bhuālū | mani-bihīna janu byākula byālū ||
idrīṃ sakala bikala bhaim̐ bhārī | janu sara sarasija banu binu bārī ||
5 श्लोक · 154 में से 326
राजा के प्राण कण्ठ में आ गए; वे मणि खोए साँप की भाँति व्याकुल हैं, सब इन्द्रियाँ ऐसी शिथिल हैं जैसे बिना जल के सरोवर में कमलवन। राजा को मलिन देखकर कौसल्या ने मन में जान लिया कि सूर्यकुल का सूर्य अस्त हो रहा है। हृदय में धीरज धरकर राममाता समय के अनुसार बोलीं, नाथ, मन में विचार कीजिए। राम का वियोग अपार समुद्र है, अवध रूपी जहाज के आप कर्णधार हैं और सब प्रियजन उस पर सवार यात्री हैं। धीरज धरेंगे तो पार लगेंगे, नहीं तो सारा परिवार डूब जाएगा। हे प्रिय, मेरी विनती मन में रखिए तो राम, लक्ष्मण और सीता फिर मिलेंगे। दोहे में प्रिया के कोमल वचन सुनकर राजा ने आँखें खोलकर देखा, मानो तड़पती मलिन मछली पर शीतल जल छिड़का गया हो।
प्रान कंठगत भयउ भुआलू । मनि-बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू ॥
इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी । जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी ॥
prāna kaṃṭhagata bhayau bhuālū | mani-bihīna janu byākula byālū ||
idrīṃ sakala bikala bhaim̐ bhārī | janu sara sarasija banu binu bārī ||
कौसल्याँ नृप दीख मलाना । रबिकुल-रबि अँथयउ जियँ जाना ॥
उर धरि धीर राम महतारी । बोली बचन समय अनुसारी ॥
kausalyām̐ nṛpa dīkha malānā | rabikula-rabi am̐thayau jiyam̐ jānā ||
ura dhari dhīra rāma mahatārī | bolī bacana samaya anusārī ||
नाथ समुझि मन करिय बिचारू । राम बियोग पयोधि अपारू ॥
करनधार तुम्ह अवध-जहाजू । चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू ॥
nātha samujhi mana kariya bicārū | rāma biyoga payodhi apārū ||
karanadhāra tumha avadha-jahājū | car̤heu sakala priya pathika samājū ||
धीरज धरिय त पाइअ पारू । नाहिँ त बूड़िहि सब परिवारू ॥
जौं जियँ धरिय बिनय पिय मोरी । राम-लखन-सिय मिलहिँ बहोरी ॥
dhīraja dhariya ta pāia pārū | nāhim̐ ta būr̤ihi saba parivārū ||
jauṃ jiyam̐ dhariya binaya piya morī | rāma-lakhana-siya milahim̐ bahorī ||
प्रिया बचन मृदु सुनत नप, चितयउ आँखि उघारि ।
तलफत मीन मलीन जनु, सींचत सीतल बारि ॥
priyā bacana mṛdu sunata napa, citayau ām̐khi ughāri |
talaphata mīna malīna janu, sīṃcata sītala bāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0