भूप सुमन्त्र लीन्ह उर लाई । बूड़त कछु अधार जनु पाई ॥
सहित सनेह निकट बैठारी । पूछत राउ नयन भरि बारी ॥
bhūpa sumantra līnha ura lāī | būr̤ata kachu adhāra janu pāī ||
sahita saneha nikaṭa baiṭhārī | pūchata rāu nayana bhari bārī ||
5 श्लोक · 149 में से 326
राजा ने सुमन्त्र को हृदय से लगा लिया, मानो डूबते को सहारा मिल गया हो। पास बैठाकर, नेत्रों में जल भरकर पूछते हैं, हे सखा, राम की कुशल कहो; रघुनाथ, लक्ष्मण और वैदेही कहाँ हैं? उन्हें लौटा लाए या वे वन चले गए? सुनते ही सचिव के नेत्र भर आए। राजा फिर सन्देश पूछते हैं और राम के रूप, गुण, शील और स्वभाव को स्मरण करके सोचते हैं कि राज्य सुनाकर वनवास दिया, तब भी उसके मन में न हर्ष हुआ न विषाद। ऐसे पुत्र के बिछुड़ने पर भी मेरे प्राण न गए; मेरे समान पापी कौन है। दोहे में वे कहते हैं, सखा, जहाँ राम, सीता और लक्ष्मण हैं वहाँ मुझे पहुँचा दो, नहीं तो सच कहता हूँ, प्राण अब चलना चाहते हैं।
भूप सुमन्त्र लीन्ह उर लाई । बूड़त कछु अधार जनु पाई ॥
सहित सनेह निकट बैठारी । पूछत राउ नयन भरि बारी ॥
bhūpa sumantra līnha ura lāī | būr̤ata kachu adhāra janu pāī ||
sahita saneha nikaṭa baiṭhārī | pūchata rāu nayana bhari bārī ||
राम कुसल कहु सखा-सनेही । कहँ रघुनाथु लखन बैदेही ॥
आने फेरि कि बनहिँ सिधाये । सुनत सचिव लोचन जल छाये ॥
rāma kusala kahu sakhā-sanehī | kaham̐ raghunāthu lakhana baidehī ||
āne pheri ki banahim̐ sidhāye | sunata saciva locana jala chāye ||
सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू । कहु सिय राम लखन संदेसू ॥
राम-रूप-गुन-सील-सुभाऊ । सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ ॥
soka bikala puni pūm̐cha naresū | kahu siya rāma lakhana saṃdesū ||
rāma-rūpa-guna-sīla-subhāū | sumiri sumiri ura socata rāū ||
राज सुनाइ दीन्ह बन-बासू । सुनि मन भयउ न हरष हराँसू ॥
सो सुत बिछुरत गये न प्राना । को पापी बड़ मोहि समाना ॥
rāja sunāi dīnha bana-bāsū | suni mana bhayau na haraṣa harām̐sū ||
so suta bichurata gaye na prānā | ko pāpī bar̤a mohi samānā ||
सखा राम-सिय-लखन जहँ, तहाँ मोहि पहुँचाउ ।
नाहिँ त चाहत चलन अब, प्रान कहउँ सतिभाउ ॥
sakhā rāma-siya-lakhana jaham̐, tahām̐ mohi pahum̐cāu |
nāhim̐ ta cāhata calana aba, prāna kahaum̐ satibhāu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0