अयोध्याकाण्ड

अध्याय 142: सुमन्त्र और निषाद का शोकपूर्ण लौटना

5 श्लोक · 142 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सुमन्त्र और निषाद का शोकपूर्ण लौटना

प्रभु सीता और लक्ष्मण की ऐसे रक्षा करते हैं जैसे पलकें पुतलियों की, और लक्ष्मण उनकी ऐसे सेवा करते हैं जैसे अविवेकी पुरुष अपने शरीर की। इस प्रकार प्रभु सुख से वन में रहते हैं। अब कथा मुड़ती है: सुनो सुमन्त्र किस प्रकार अवध आए। प्रभु को पहुँचाकर निषाद लौटा तो मन्त्री को रथ के पास देखा, जिनकी व्याकुलता कही नहीं जाती। राम राम, सीता, लक्ष्मण पुकारते हुए सुमन्त्र धरती पर गिर पड़े। घोड़े दक्षिण की ओर देखकर हिनहिनाते हैं, मानो बिना पंख के पक्षी छटपटा रहे हों। दोहे में वे न घास चरते हैं न पानी पीते हैं, आँखों से आँसू बहाते हैं; रघुवर के घोड़ों को देखकर सब निषाद व्याकुल हो गए।

142.1

जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें । पलक-बिलोचन-गोलक जैसें ॥
सेवहिँ लखन सीय-रघुबीरहि । जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि ॥

jogavahiṃ prabhu siya lakhanahiṃ kaiseṃ | palaka-bilocana-golaka jaiseṃ ||
sevahim̐ lakhana sīya-raghubīrahi | jimi abibekī puruṣa sarīrahi ||

142.2

एहि बिधि प्रभु बन बसहिँ सुखारी । खग-मृग-सुर-तापस हितकारी ॥
कहेउँ राम-बन-गवन सुहावा । सुनहु सुमन्त्र अवध जिमि आवा ॥

ehi bidhi prabhu bana basahim̐ sukhārī | khaga-mṛga-sura-tāpasa hitakārī ||
kaheum̐ rāma-bana-gavana suhāvā | sunahu sumantra avadha jimi āvā ||

142.3

फिरेउ निषाद प्रभुहि पहुँचाई । सचिव सहित रथ देखेसि आई ॥
मन्त्री विकल बिलोकि निषादू । कहि न जाइ जस भयउ बिषादू ॥

phireu niṣāda prabhuhi pahum̐cāī | saciva sahita ratha dekhesi āī ||
mantrī vikala biloki niṣādū | kahi na jāi jasa bhayau biṣādū ||

142.4

राम राम सिय लखन पुकारी । परेउ धरनितल व्याकुल भारी ॥
देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं । जनु बिनु पङ्ख बिहँग अकुलाहीं ॥

rāma rāma siya lakhana pukārī | pareu dharanitala vyākula bhārī ||
dekhi dakhina disi haya hihināhīṃ | janu binu paṅkha biham̐ga akulāhīṃ ||

दो॰ 142दोहा

नहिँ तृन चरहिं पिअहिं जल, मोचहिं लोचन बारि ।
व्याकुल भयउ निषाद सब, रघुबर-बाजि निहारि ॥

nahim̐ tṛna carahiṃ piahiṃ jala, mocahiṃ locana bāri |
vyākula bhayau niṣāda saba, raghubara-bāji nihāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0