अयोध्याकाण्ड

अध्याय 131: जो हृदय कुछ नहीं चाहता

5 श्लोक · 131 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

जो हृदय कुछ नहीं चाहता

मुनि सूची पूरी करते हैं। जो अवगुण छोड़कर सबके गुण ग्रहण करते हैं, ब्राह्मण और गौ के लिए संकट सहते हैं, और नीति में निपुण हैं, उनका मन आपका घर है। जो गुण आपका और दोष अपना समझता है, जिसे सब प्रकार आपका भरोसा है और राम के भक्त प्रिय लगते हैं, उसके हृदय में वैदेही सहित बसिए। जो जाति, धन, धर्म, बड़ाई, परिवार और घर सब छोड़कर आपको ही हृदय से लगाए रहता है, उसके हृदय में रहिए। जिसे स्वर्ग, नरक और मोक्ष समान हैं, जो सर्वत्र आपको धनुष बाण लिए देखता है और कर्म, वचन तथा मन से आपका दास है, उसके हृदय में डेरा कीजिए। दोहा कहता है कि जिसे कुछ नहीं चाहिए और आपसे सहज स्नेह है, उसका मन आपका अपना घर है।

131.1

अवगुन तजि सब के गुन गहहीँ । विप्र-धेनु-हित सङ्कट सहहीं ॥
नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका । घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका ॥

avaguna taji saba ke guna gahahīm̐ | vipra-dhenu-hita saṅkaṭa sahahīṃ ||
nīti nipuna jinha kai jaga līkā | ghara tumhāra tinha kara manu nīkā ||

131.2

गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा । जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा ॥
राम भगत प्रिय लागहिँ जेही । तेहि उर बसहु सहित बैदेही ॥

guna tumhāra samujhai nija dosā | jehi saba bhām̐ti tumhāra bharosā ||
rāma bhagata priya lāgahim̐ jehī | tehi ura basahu sahita baidehī ||

131.3

जाति पाँति धन धरम बड़ाई । प्रिय-परिवार सदन-सुखदाई ॥
सब तजि तुम्हहिँ रहइ उर लाई । तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई ॥

jāti pām̐ti dhana dharama bar̤āī | priya-parivāra sadana-sukhadāī ||
saba taji tumhahim̐ rahai ura lāī | tehi ke hṛdayam̐ rahahu raghurāī ||

131.4

सरग नरक अपबरग समाना । जहँ तहँ देख धरें धनु बाना ॥
करम-बचन-मन राउर चेरा । राम करहु तेहि कें उर डेरा ॥

saraga naraka apabaraga samānā | jaham̐ taham̐ dekha dhareṃ dhanu bānā ||
karama-bacana-mana rāura cerā | rāma karahu tehi keṃ ura ḍerā ||

दो॰ 131दोहा

जाहि न चाहिय कबहुँ कछु, तुम्ह सन सहज सनेह ।
बसहु निरन्तर तासु मन, से राउर निज-गेह ॥

jāhi na cāhiya kabahum̐ kachu, tumha sana sahaja saneha |
basahu nirantara tāsu mana, se rāura nija-geha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0