अजहुँ जासु उर सपनेहुँ काऊ । बसहुँ लखन-सिय-राम बटाऊ ॥
राम धाम पथ पाइहि सोई । जो पथ पाव कबहुँ मुनि कोई ॥
ajahum̐ jāsu ura sapanehum̐ kāū | basahum̐ lakhana-siya-rāma baṭāū ||
rāma dhāma patha pāihi soī | jo patha pāva kabahum̐ muni koī ||
5 श्लोक · 124 में से 326
गोस्वामीजी मार्ग के प्रसंग को यह कहकर समेटते हैं कि आज भी जिसके हृदय में स्वप्न में भी लक्ष्मण, सीता और श्रीराम ये तीन बटोही बसते हैं, वह श्रीराम के धाम का वह मार्ग पा लेगा जो कभी किसी विरले मुनि को मिलता है। सीता को थकी जानकर श्रीराम पास के बरगद तले शीतल जल के निकट ठहरते हैं। कन्द, मूल और फल खाकर, प्रातः स्नान करके वे आगे चलते हैं और सुन्दर वन, सरोवर और पर्वत देखते हुए वाल्मीकि के आश्रम पहुँचते हैं। वहाँ कमल खिले हैं, भौंरे गूँज रहे हैं, पशु और पक्षी वैर छोड़कर आनन्द से विचर रहे हैं। पवित्र आश्रम देखकर कमलनयन प्रभु हर्षित होते हैं और मुनि उनका आगमन सुनकर उन्हें लेने आगे आते हैं।
अजहुँ जासु उर सपनेहुँ काऊ । बसहुँ लखन-सिय-राम बटाऊ ॥
राम धाम पथ पाइहि सोई । जो पथ पाव कबहुँ मुनि कोई ॥
ajahum̐ jāsu ura sapanehum̐ kāū | basahum̐ lakhana-siya-rāma baṭāū ||
rāma dhāma patha pāihi soī | jo patha pāva kabahum̐ muni koī ||
तब रघुबीर श्रमित सिय जानी । देखि निकट बट सीतल पानी ॥
तहँ बसि कन्द मूल फल खाई । प्रात नहाइ चले रघुराई ॥
taba raghubīra śramita siya jānī | dekhi nikaṭa baṭa sītala pānī ||
taham̐ basi kanda mūla phala khāī | prāta nahāi cale raghurāī ||
देखत बन सर सैल सुहाये । बालमीकि आश्रम प्रभु आये ॥
राम दीख मुनि-बास सुहावन । सुन्दर गिरि कानन जल पावन ॥
dekhata bana sara saila suhāye | bālamīki āśrama prabhu āye ||
rāma dīkha muni-bāsa suhāvana | sundara giri kānana jala pāvana ||
सरनि सरोज बिटप बन फूले । गुञ्जत मज्जु मधुप रस भूले ॥
खग-मृग-बिपुल कोलाहल करहीं । विरहित बैर मुदित मन चरहीं ॥
sarani saroja biṭapa bana phūle | guñjata majju madhupa rasa bhūle ||
khaga-mṛga-bipula kolāhala karahīṃ | virahita baira mudita mana carahīṃ ||
सुचि सुन्दर आश्रमु निरखि, हरषे राजिव-नैन ।
सुनि रघुबर आगमन मुनि, आगें आयउ लेन ॥
suci sundara āśramu nirakhi, haraṣe rājiva-naina |
suni raghubara āgamana muni, āgeṃ āyau lena ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0