अयोध्याकाण्ड

अध्याय 123: दोनों भाइयों के बीच चलती सीता

5 श्लोक · 123 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

दोनों भाइयों के बीच चलती सीता

आगे राम हैं और पीछे लक्ष्मण, दोनों तपस्वी वेश में सुशोभित हैं। दोनों के बीच सीता ऐसी शोभा पाती हैं जैसे ब्रह्म और जीव के बीच माया। फिर उपमा है, मानो वसन्त और कामदेव के बीच रति शोभित हो। फिर हृदय में खोजकर कहते हैं, मानो बुध और चन्द्रमा के बीच रोहिणी हो। सीता प्रभु के पद चिह्नों के बीच सँभलकर पाँव रखती हैं, और लक्ष्मण सीता और राम के चरण चिह्न बचाकर दाहिनी ओर मार्ग पर चलते हैं। तीनों की प्रीति वाणी से परे है। पक्षी और मृग छवि देखकर मग्न हो जाते हैं, बटोही राम ने उनके चित्त चुरा लिए। जिन्होंने पथिकों के प्यारे, सीता सहित दोनों भाइयों को देखा, वे संसार के दुर्गम मार्ग को बिना श्रम पार करके आनन्द पा गए।

123.1

आगे राम लखन बने पाछें । तापस-बेष बिराजत काछें ॥
उभय बीच सिय सोहति कैसे । ब्रह्म जीव बिच माया जैसे ॥

āge rāma lakhana bane pācheṃ | tāpasa-beṣa birājata kācheṃ ||
ubhaya bīca siya sohati kaise | brahma jīva bica māyā jaise ||

123.2

बहुरि कहउँ छबि जसि मन बसई । जनु मधु-मदन मध्य रति लसई ॥
उपमा बहुरि कहउँ जियँ जोही । जनु बुध-बिधु बिच रोहिनि सोही ॥

bahuri kahaum̐ chabi jasi mana basaī | janu madhu-madana madhya rati lasaī ||
upamā bahuri kahaum̐ jiyam̐ johī | janu budha-bidhu bica rohini sohī ||

123.3

प्रभु-पद-रेख बीच बीच सीता । धरति चरन मग चलति सभीता ॥
सीय-राम-पद अङ्क बराये । लखन चलहिँ मग दाहिन लाये ॥

prabhu-pada-rekha bīca bīca sītā | dharati carana maga calati sabhītā ||
sīya-rāma-pada aṅka barāye | lakhana calahim̐ maga dāhina lāye ||

123.4

राम-लखन-सिय प्रीति सुहाई । बचन अगोचर किमि कहि जाई ॥
खग-मृग-मगन देखि छवि होहीँ । लिये चोरि चित राम बटोहीं ॥

rāma-lakhana-siya prīti suhāī | bacana agocara kimi kahi jāī ||
khaga-mṛga-magana dekhi chavi hohīm̐ | liye cori cita rāma baṭohīṃ ||

दो॰ 123दोहा

जिन्ह जिन्ह देखे पथिक-प्रिय, सिय समेत दोउ भाइ ।
भव-मग अगम अनन्द तेइ, बिनु श्रम रहे सिराइ ॥

jinha jinha dekhe pathika-priya, siya sameta dou bhāi |
bhava-maga agama ananda tei, binu śrama rahe sirāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0