अयोध्याकाण्ड

अध्याय 106: त्रिवेणी स्नान और भरद्वाज से भेंट

5 श्लोक · 106 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

त्रिवेणी स्नान और भरद्वाज से भेंट

पापों के हाथियों के झुण्ड के लिए सिंह रूप प्रयाग का प्रभाव कौन कह सकता है? ऐसे सुहावने तीर्थपति को देखकर सुख के सागर रघुबर ने भी सुख पाया। उन्होंने अपने श्रीमुख से सीता, लक्ष्मण और सखा को तीर्थराज की महिमा सुनाई। इस प्रकार आकर उन्होंने त्रिवेणी के दर्शन किए, जिसका स्मरण ही सब मंगल देता है। प्रसन्न होकर स्नान किया, शिव की सेवा की और विधिपूर्वक तीर्थ देवताओं का पूजन किया। तब प्रभु भरद्वाज के पास आए, दण्डवत करते ही मुनि ने उन्हें हृदय से लगा लिया। मुनि के मन का आनन्द कहा नहीं जाता, मानो ब्रह्मानन्द की राशि मिल गई हो। मुनीश्वर ने आशीर्वाद दिया, मानो विधाता ने उनके पुण्यों का फल आँखों के सामने ला रखा हो।

106.1

को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ । कलुष पुञ्ज कुञ्जर मृगराऊ ॥
अस तीरथपति देखि सुहावा । सुख सागर रघुबर सुख पावा ॥

ko kahi sakai prayāga prabhāū | kaluṣa puñja kuñjara mṛgarāū ||
asa tīrathapati dekhi suhāvā | sukha sāgara raghubara sukha pāvā ||

106.2

कहि सिय लखनहिँ सखहि सुनाई । श्रीमुख तीरथराज बड़ाई ॥
करि प्रनामु देखत बन बागा । कहत महातम अति अनुरागा ॥

kahi siya lakhanahim̐ sakhahi sunāī | śrīmukha tīratharāja bar̤āī ||
kari pranāmu dekhata bana bāgā | kahata mahātama ati anurāgā ||

106.3

एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी । सुमिरत सकल सुमङ्गल-देनी ॥
मुदित नहाइ कीन्हि सिव-सेवा । पूजि जथा-विधि तीरथ-देवा ॥

ehi bidhi āi bilokī benī | sumirata sakala sumaṅgala-denī ||
mudita nahāi kīnhi siva-sevā | pūji jathā-vidhi tīratha-devā ||

106.4

तब प्रभु भरद्वाज पहिँ आये । करत दंडवत मुनि उर लाये ॥
मुनि मन मोद न कछु कहि जाई । ब्रह्मानन्द-रासि जनु पाई ॥

taba prabhu bharadvāja pahim̐ āye | karata daṃḍavata muni ura lāye ||
muni mana moda na kachu kahi jāī | brahmānanda-rāsi janu pāī ||

दो॰ 106दोहा

दीन्हि असीस मुनीस उर, अति अनन्द अस जानि ।
लोचन-गोचर सुकृत-फल, मनहुँ किये बिधि आनि ॥

dīnhi asīsa munīsa ura, ati ananda asa jāni |
locana-gocara sukṛta-phala, manahum̐ kiye bidhi āni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0