अयोध्याकाण्ड

अध्याय 105: तीर्थराज प्रयाग का राजरूप वर्णन

5 श्लोक · 105 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

तीर्थराज प्रयाग का राजरूप वर्णन

वृक्ष के नीचे रात बिताकर सबेरे प्रभु तीर्थराज प्रयाग देखने गए। तुलसीदास प्रयाग को राजा के रूप में चित्रित करते हैं। सत्य उसका मन्त्री है, श्रद्धा प्रिय रानी, और माधव हितकारी मित्र। चारों पदार्थों से भण्डार भरा है और उसका देश पुण्यमय तथा अत्यन्त सुन्दर है। उसका क्षेत्र दुर्गम और गढ़ ऐसा दृढ़ है कि शत्रु सपने में भी नहीं पा सकते। सब तीर्थ उसकी वीर सेना हैं, जो पाप की सेना को कुचलने में रणधीर हैं। संगम उसका सुहावना सिंहासन है, अक्षयवट छत्र है, और यमुना तथा गंगा की लहरें चँवर हैं, जिन्हें देखकर दुख और दरिद्रता मिट जाते हैं। वेद पुराण बन्दीजनों की तरह उसके निर्मल गुण गाते हैं।

105.1

तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू । लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू ॥
प्रात प्रातकृत करि रघुराई । तीरथराज दीख प्रभु जाई ॥

tehi dina bhayau biṭapa tara bāsū | lakhana sakhām̐ saba kīnha supāsū ||
prāta prātakṛta kari raghurāī | tīratharāja dīkha prabhu jāī ||

105.2

सचिव सत्य श्रध्दा प्रिय नारी । माधव सरिस मीत हितकारी ॥
चारि पदारथ भरा भँडारु । पुन्य प्रदेस देस अति चारु ॥

saciva satya śradhdā priya nārī | mādhava sarisa mīta hitakārī ||
cāri padāratha bharā bham̐ḍāru | punya pradesa desa ati cāru ||

105.3

छेत्र अगम गढ़ गाढ़ सुहावा । सपनेहुँ नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा ॥
सेन सकल तीरथ बर बीरा । कलुष अनीक दलन रनधीरा ॥

chetra agama gar̤ha gār̤ha suhāvā | sapanehum̐ nahiṃ pratipacchinha pāvā ||
sena sakala tīratha bara bīrā | kaluṣa anīka dalana ranadhīrā ||

105.4

सङ्गम सिंहासनु सुठि सोहा । छत्र अखयबटु मुनि मन मोहा ॥
चवँर जमुन अरु गङ्ग तरङ्गा । देखि होहिं दुख दारिद भङ्गा ॥

saṅgama siṃhāsanu suṭhi sohā | chatra akhayabaṭu muni mana mohā ||
cavam̐ra jamuna aru gaṅga taraṅgā | dekhi hohiṃ dukha dārida bhaṅgā ||

दो॰ 105दोहा

सेवहिँ सुकृती साधु सुचि, पावहिं सब मनकाम ।
बन्दी बेद पुरान गन, कहहिं बिमल गुन ग्राम ॥

sevahim̐ sukṛtī sādhu suci, pāvahiṃ saba manakāma |
bandī beda purāna gana, kahahiṃ bimala guna grāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0