अरण्यकाण्ड

अध्याय 7: विराध का उद्धार, शरभंग के आश्रम में आगमन

5 श्लोक · 7 में से 46

इस अध्याय में क्या होता है

विराध का उद्धार, शरभंग के आश्रम में आगमन

मुनि के चरणकमलों में सिर नवाकर देवों, मनुष्यों और मुनियों के स्वामी वन की ओर चले। आगे राम, पीछे भाई लक्ष्मण, दोनों मुनियों के वेश में, और बीच में सीता ऐसी शोभित हैं जैसे ब्रह्म और जीव के बीच माया। नदी, वन, पर्वत और दुर्गम घाट अपने स्वामी को पहचानकर मार्ग सुगम कर देते हैं, और जहाँ-जहाँ रघुराज जाते हैं, वहाँ-वहाँ मेघ आकाश में छाया करते हैं। मार्ग में विराध राक्षस मिला; आते ही रघुवीर ने उसे मार गिराया। उसने तुरन्त सुन्दर रूप पाया और प्रभु ने उसे दुखी देखकर अपने धाम भेज दिया। फिर वे भाई और जानकी के साथ शरभंग मुनि के आश्रम पहुँचे। मुनि के नेत्र-भ्रमर राम के मुखकमल का रस आदर से पीते रहे। शरभंग का जन्म धन्य हुआ।

7.1

मुनि पद कमल नाइ करि सीसा । चले बनहिँ सुर नर मुनि ईसा ॥
आगे राम अनुज पुनि पाछें । मुनि बर बेष बने अति काछें ॥

muni pada kamala nāi kari sīsā | cale banahim̐ sura nara muni īsā ||
āge rāma anuja puni pācheṃ | muni bara beṣa bane ati kācheṃ ||

7.2

उभय बीच श्री सोहइ कैसी । ब्रह्म जीव बिच माया जैसी ॥
सरिता बन गिरि अवघट घाटा । पति पहिचानि देहिँ घर बाटा ॥

ubhaya bīca śrī sohai kaisī | brahma jīva bica māyā jaisī ||
saritā bana giri avaghaṭa ghāṭā | pati pahicāni dehim̐ ghara bāṭā ||

7.3

जहँ जहँ जाहि देव रघुराया । करहिं मेध तहँ तहँ नभ छाया ॥
मिला असुर विराध मग जाता । आवतहीं रघुबीर-निपाता ॥

jaham̐ jaham̐ jāhi deva raghurāyā | karahiṃ medha taham̐ taham̐ nabha chāyā ||
milā asura virādha maga jātā | āvatahīṃ raghubīra-nipātā ||

7.4

तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा । देखि दुखी निज धाम पठावा ॥
पुनि आये जहँ मुनि सरभङ्गा । सुन्दर अनुज जानकी सङ्गा ॥

turatahiṃ rucira rūpa tehiṃ pāvā | dekhi dukhī nija dhāma paṭhāvā ||
puni āye jaham̐ muni sarabhaṅgā | sundara anuja jānakī saṅgā ||

दो॰ 7दोहा

देखि राम-सुख-पङ्कज, मुनिबर-लोचन-भृङ्ग ।
सादर पान करत अति, धन्य जन्म सरभंग ॥

dekhi rāma-sukha-paṅkaja, munibara-locana-bhṛṅga |
sādara pāna karata ati, dhanya janma sarabhaṃga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0