अरण्यकाण्ड

अध्याय 40: पम्पा सरोवर के तट की शोभा

6 श्लोक · 40 में से 46

इस अध्याय में क्या होता है

पम्पा सरोवर के तट की शोभा

पम्पा सरोवर में अनेक रंगों के कमल खिले हैं, जिन पर भौंरों के झुण्ड मधुर गुंजार करते हैं। जलमुर्गे और कलहंस बोलते हैं, मानो प्रभु को देखकर उनकी प्रशंसा कर रहे हों। सुन्दर पक्षियों की मीठी बोली मानो जाते हुए पथिकों को बुला लेती है। सरोवर के पास मुनियों ने आश्रम छा रखे हैं, और चारों ओर वन के सुहावने वृक्ष हैं, चम्पा, कदम्ब, तमाल और आम। वृक्ष नए पत्तों और फूलों से लदे हैं, और शीतल, मन्द, सुगन्धित मनोहर पवन सदा बहता है। कोयलें कुहू-कुहू करती हैं, जिनकी रसीली ध्वनि सुनकर मुनियों का ध्यान टूट जाता है। फलों के भार से सब वृक्ष धरती के पास झुक गए हैं, जैसे परोपकारी पुरुष सम्पत्ति पाकर और नम्र हो जाते हैं।

40.1

बिकसे सरसिज नाना रङ्गा । मधुर मुखर गुञ्जत बहु भृङ्गा ॥
बोलत जलकुक्कुट कलहंसा । प्रभु बिलोकि जनु करत प्रसंसा ॥

bikase sarasija nānā raṅgā | madhura mukhara guñjata bahu bhṛṅgā ||
bolata jalakukkuṭa kalahaṃsā | prabhu biloki janu karata prasaṃsā ||

40.2

चक्रवाक बक खग समुदाई । देखत बनइ बरनि नहिं जाई ॥
सुन्दर खग-गन गिरा सुहाई । जात पथिक जनु लेत बोलाई ॥

cakravāka baka khaga samudāī | dekhata banai barani nahiṃ jāī ||
sundara khaga-gana girā suhāī | jāta pathika janu leta bolāī ||

40.3

ताल समीप मुनिन्ह गृह छाये । चहुँ दिसि कानन बिटप सुहाये ॥
चम्पक बकुल कदंब तमाला । पाटल पनस परास रसाला ॥

tāla samīpa muninha gṛha chāye | cahum̐ disi kānana biṭapa suhāye ||
campaka bakula kadaṃba tamālā | pāṭala panasa parāsa rasālā ||

40.4

नव पल्लव कुसुमित तरु नाना । चंचरीक-पटली कर गाना ॥
सीतल मन्द सुगन्ध सुभाऊ । सन्तत बहइ मनोहर बाऊ ॥

nava pallava kusumita taru nānā | caṃcarīka-paṭalī kara gānā ||
sītala manda sugandha subhāū | santata bahai manohara bāū ||

40.5

कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीँ । सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं ॥

kuhū kuhū kokila dhuni karahīm̐ | suni rava sarasa dhyāna muni ṭarahīṃ ||

दो॰ 40दोहा

फल भारन नमि बिटप सब, रहे भूमि निअराइ ।
पर-उपकारी-पुरुष जिमि, नवहिं सुसम्पति पाई ॥

phala bhārana nami biṭapa saba, rahe bhūmi niarāi |
para-upakārī-puruṣa jimi, navahiṃ susampati pāī ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0