நமச்சிவாய வாஅழ்க நாதன் தாள் வாழ்க
இமைப்பொழுதும் என் நெஞ்சில் நீங்காதான் தாள் வாழ்க
கோகழி ஆண்ட குருமணிதன் தாள் வாழ்க
ஆகமம் ஆகிநின்று அண்ணிப்பான் தாள் வாழ்க
ஏகன் அநேகன் இறைவன் அடிவாழ்க
வேகம் கெடுத்தாண்ட வேந்தன் அடிவெல்க
பிறப்பறுக்கும் பிஞ்ஞகன்தன் பெய்கழல்கள் வெல்க
புறந்தார்க்குச் சேயோன் தன் பூங்கழல்கள் வெல்க
கரங்குவிவார் உள்மகிழும் கோன்கழல்கள் வெல்க
சிரம்குவிவார் ஓங்குவிக்கும் சீரோன் கழல் வெல்க
ஈசன் அடிபோற்றி எந்தை அடிபோற்றி
தேசன் அடிபோற்றி சிவன் சேவடி போற்றி
நேயத்தே நின்ற நிமலன் அடி போற்றி
மாயப் பிறப்பு அறுக்கும் மன்னன் அடி போற்றி
சீரார் பெருந்துறை நம் தேவன் அடி போற்றி
ஆராத இன்பம் அருளும் மலை போற்றி
சிவன் அவன் என்சிந்தையுள் நின்ற அதனால்
அவன் அருளாலே அவன் தாள் வணங்கிச்
சிந்தை மகிழச் சிவ புராணம் தன்னை
முந்தை வினைமுழுதும் ஓய உரைப்பன் யான்
नमच्चिवाय वाअऴ्ग नादऩ् ताळ् वाऴ्ग
इमैप्पॊऴुदुम् ऎऩ् नॆञ्जिल् नीङ्गादाऩ् ताळ् वाऴ्ग
कोगऴि आण्ड गुरुमणिदऩ् ताळ् वाऴ्ग
आगमम् आगिनिऩ्ऱु अण्णिप्पाऩ् ताळ् वाऴ्ग
एगऩ् अनेगऩ् इऱैवऩ् अडिवाऴ्ग
वेगम् कॆडुत्ताण्ड वेन्दऩ् अडिवॆल्ग
पिऱप्पऱुक्कुम् पिञ्ञगऩ्दऩ् पॆय्गऴल्गळ् वॆल्ग
पुऱन्दार्क्कुच् चेयोऩ् तऩ् पूङ्गऴल्गळ् वॆल्ग
करङ्गुविवार् उळ्मगिऴुम् कोऩ्गऴल्गळ् वॆल्ग
सिरम्गुविवार् ओङ्गुविक्कुम् सीरोऩ् कऴल् वॆल्ग
ईसऩ् अडिबोऱ्ऱि ऎन्दै अडिबोऱ्ऱि
तेसऩ् अडिबोऱ्ऱि सिवऩ् सेवडि पोऱ्ऱि
नेयत्ते निऩ्ऱ निमलऩ् अडि पोऱ्ऱि
मायप् पिऱप्पु अऱुक्कुम् मऩ्ऩऩ् अडि पोऱ्ऱि
सीरार् पॆरुन्दुऱै नम् तेवऩ् अडि पोऱ्ऱि
आराद इऩ्बम् अरुळुम् मलै पोऱ्ऱि
सिवऩ् अवऩ् ऎऩ्सिन्दैयुळ् निऩ्ऱ अदऩाल्
अवऩ् अरुळाले अवऩ् ताळ् वणङ्गिच्
सिन्दै मगिऴच् सिव पुराणम् तऩ्ऩै
मुन्दै विऩैमुऴुदुम् ओय उरैप्पऩ् याऩ्
namaccivāya vāaḻga nādaṉ tāḷ vāḻga
imaippoḻudum eṉ neñjil nīṅgādāṉ tāḷ vāḻga
kōgaḻi āṇḍa gurumaṇidaṉ tāḷ vāḻga
āgamam āginiṉṟu aṇṇippāṉ tāḷ vāḻga
ēgaṉ anēgaṉ iṟaivaṉ aḍivāḻga
vēgam keḍuttāṇḍa vēndaṉ aḍivelga
piṟappaṟukkum piññagaṉdaṉ peygaḻalgaḷ velga
puṟandārkkuc cēyōṉ taṉ pūṅgaḻalgaḷ velga
karaṅguvivār uḷmagiḻum kōṉgaḻalgaḷ velga
siramguvivār ōṅguvikkum sīrōṉ kaḻal velga
īsaṉ aḍibōṟṟi endai aḍibōṟṟi
tēsaṉ aḍibōṟṟi sivaṉ sēvaḍi pōṟṟi
nēyattē niṉṟa nimalaṉ aḍi pōṟṟi
māyap piṟappu aṟukkum maṉṉaṉ aḍi pōṟṟi
sīrār perunduṟai nam tēvaṉ aḍi pōṟṟi
ārāda iṉbam aruḷum malai pōṟṟi
sivaṉ avaṉ eṉsindaiyuḷ niṉṟa adaṉāl
avaṉ aruḷālē avaṉ tāḷ vaṇaṅgic
sindai magiḻac siva purāṇam taṉṉai
mundai viṉaimuḻudum ōya uraippaṉ yāṉ
अर्थ
1–5. नमः शिवाय की जय! स्वामी के चरणों की जय। पलक झपकने भर को भी मेरे हृदय से न हटने वाले के चरणों की जय। कोगऴि में मुझे अपनाने वाले रत्न-से गुरु के चरणों की जय। आगम बनकर स्थित और माधुर्य से निकट आने वाले के चरणों की जय। एक भी, अनेक भी, उन प्रभु के चरणों की जय।
6–10. मेरी चंचल आतुरता मिटाकर मुझ पर शासन करने वाले राजा के चरणों की विजय हो। जन्म का बन्धन काटने वाले पिञ्ञगन (शिव) के नूपुर-धारी चरणों की विजय हो। जो बाहर खड़े हैं उनसे दूर रहने वाले के पुष्प-चरणों की विजय हो। हाथ जोड़ने वालों के भीतर आनन्दित होने वाले राजा के चरणों की विजय हो। सिर झुकाने वालों को ऊँचा उठाने वाले यशस्वी के चरणों की विजय हो।
11–16. ईश के चरणों को नमन, मेरे पिता के चरणों को नमन। तेजस्वी के चरणों को नमन, शिव के लाल चरणों को नमन। प्रेम में स्थित निर्मल प्रभु के चरणों को नमन। माया-रूपी जन्म को काटने वाले राजा के चरणों को नमन। महिमामय पॆरुन्दुऱै के हमारे देव के चरणों को नमन। कभी न घटने वाला आनन्द देने वाले पर्वत को नमन।
17–20. क्योंकि शिव मेरे चिन्तन में स्थित हैं, उन्हीं की कृपा से उनके चरणों में प्रणाम करके, ताकि मेरा मन आनन्दित हो और मेरे पूर्व कर्म पूरी तरह शान्त हों, मैं यह शिवपुराण कहता हूँ।
इस भजन के बारे में
माणिक्कवासगर पाण्ड्य राजा के मंत्री थे। घोड़े ख़रीदने भेजे गए, तो तिरुप्पॆरुन्दुऱै (जिसे कोगऴि भी कहते हैं) में कुरुन्द वृक्ष के नीचे गुरु-रूप में भगवान शिव से उनका मिलन हुआ; उन्होंने राजा का सोना मन्दिर को दे दिया और जीवन भर के लिए भक्त हो गए। तमिऴ शैव कहते हैं: ‘जो तिरुवासगम् से नहीं पिघलता, वह किसी से नहीं पिघलेगा।’ शिवपुराणम् इसका पहला स्तोत्र है, कुल पंचानवे पंक्तियाँ; ये पहली बीस हैं, जिन्हें बहुत से लोग प्रतिदिन सुबह पढ़ते हैं। पाँचवीं पंक्ति ‘एक भी, अनेक भी’ और अठारहवीं ‘उन्हीं की कृपा से उनके चरणों में प्रणाम’ तमिऴ भक्ति की सबसे अधिक उद्धृत पंक्तियों में हैं।
Tiruvasagam (Tirumurai 8), hymn 1 Sivapuranam, lines 1–20 of 95, Project Madurai e-text pm0003_01
