वेल्लोर विद्रोह

पक्षमद्रास सेना के सिपाहीपहली और तेईसवीं मद्रास नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही
1806 ई.बनाम
विजेताईस्ट इंडिया कंपनीकर्नल रोलो गिलेस्पी

मेरठ से इक्यावन वर्ष पहले वेल्लोर के भारतीय सिपाही उन कंपनी अफ़सरों के विरुद्ध उठ खड़े हुए जिन्होंने उन्हें दाढ़ी मुँडाने, माथे से तिलक हटाने और चमड़े की कलगी वाली नई पगड़ी पहनने का आदेश दिया था।

तिथि: 10 जुलाई 1806 ई.स्थान: वेल्लोर का किला, तमिलनाडुप्रकार: विद्रोह
चित्र: Charles Gold · Public domain
परिणाम

सिपाहियों ने कुछ घंटे किला अपने हाथ में रखा, फिर अर्काट से आए गिलेस्पी के घुड़सवारों ने उसी दिन किला वापस लेकर विद्रोह कुचल दिया।

01नई वर्दी का आदेश

1805 में मद्रास सेना के प्रधान सेनापति सर जॉन क्रैडॉक के अधीन नए नियम जारी हुए। सिपाहियों को माथे पर तिलक या कोई चिह्न लगाने से रोका गया, दाढ़ी एक ही ढंग से कटवाने को कहा गया, और एक गोल पगड़ी दी गई जिसमें बहुतों को चमड़ा होने का संदेह था। हिन्दू और मुसलमान, दोनों सिपाहियों ने इसे अपने धर्म पर चोट माना। विरोध करने वालों को कोड़े लगे। वेल्लोर के किले में 1799 से टीपू सुल्तान के बेटे राजबंदी बनाकर रखे गए थे, और उनके परिवार की उपस्थिति ने असंतोष को और भड़काया।

02वह रात और वह सुबह

10 जुलाई 1806 की भोर से पहले सिपाहियों ने 69वीं रेजिमेंट की अंग्रेज़ टुकड़ी पर धावा बोला, सौ से अधिक अफ़सर और सैनिक मारे गए, और किले पर झंडा फहराया गया। एक घुड़सवार सोलह मील दूर अर्काट तक ख़बर ले गया। कर्नल रोलो गिलेस्पी 19वीं लाइट ड्रैगून्स के साथ सरपट आया, हल्की तोपों से फाटक उड़ाया और दोपहर से पहले वेल्लोर वापस ले लिया। कई सौ सिपाही किले में मारे गए या बाद में फाँसी पर चढ़ाए गए। मद्रास सरकार ने वर्दी के आदेश वापस लिए और गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिंक को वापस बुला लिया गया।

महत्त्व

वेल्लोर कंपनी के विरुद्ध सिपाहियों का पहला बड़ा विद्रोह था, और इसने पहले ही दिखा दिया कि धर्म और रीति में दख़ल कंपनी की अपनी सेना को उसके विरुद्ध खड़ा कर सकता है।