नमक सत्याग्रह

पक्षभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सत्याग्रहीमहात्मा गांधी
1930 ई.बनाम
पक्षब्रिटिश राजवायसराय लॉर्ड इरविन

अंग्रेज़ी नमक कर को तोड़कर नमक बनाने के लिए गांधी लगभग 385 किलोमीटर पैदल चलकर दांडी के समुद्र तट पहुँचे, और पूरा देश उनके पीछे सविनय अवज्ञा में उतर आया।

तिथि: 12 मार्च 1930 – मार्च 1931 ई.स्थान: साबरमती से दांडी, गुजरात, और पूरे भारत मेंप्रकार: अभियान
चित्र: Unknown authorUnknown author · Public domain
परिणाम

साठ हज़ार से अधिक लोग जेल गए; अभियान मार्च 1931 के गांधी–इरविन समझौते और दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में गांधी की उपस्थिति के साथ समाप्त हुआ।

01यात्रा

नमक पर सरकार कर लेती थी, और भारतीयों को स्वयं नमक बनाने की मनाही थी। गांधी ने इसे इसलिए चुना कि यह हर घर में काम आता था। 12 मार्च 1930 को वे अठहत्तर साथियों के साथ साबरमती आश्रम से निकले, गुजरात के गाँवों से होकर चलते और हर शाम सभा करते। सड़क के दोनों ओर भीड़ उमड़ी। 5 अप्रैल को वे दांडी पहुँचे और अगली सुबह तट से प्राकृतिक नमक का एक डला उठाकर क़ानून तोड़ा। पूरे भारत में लोगों ने नमक बनाया, विदेशी कपड़े का बहिष्कार किया और कर देने से मना किया; तमिल तट पर च. राजगोपालाचारी ने वेदारण्यम तक नमक यात्रा का नेतृत्व किया।

02धरासना और समझौता

4–5 मई की रात गांधी पकड़े गए। 21 मई को सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में सत्याग्रहियों के एक के बाद एक जत्थे धरासना नमक कारख़ाने की ओर बढ़े और पुलिस की लोहे की नोक वाली लाठियों से गिराए गए, पर किसी ने हाथ नहीं उठाया। अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर की इसकी रिपोर्ट पूरी दुनिया में पढ़ी गई। वर्ष के अंत तक साठ हज़ार से अधिक लोग जेल में थे। मार्च 1931 में गांधी और इरविन ने समझौता किया: बंदी छोड़े गए, तटीय गाँवों को नमक बनाने की छूट मिली, और कांग्रेस लंदन के गोलमेज़ सम्मेलन में गई।

महात्मा गांधी
व्यक्तित्व · 2 अक्टूबर 1869 – 30 जनवरी 1948महात्मा गांधीपोरबंदर के मोहनदास करमचंद गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह का रूप गढ़ा और असहयोग, नमक सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन में कांग्रेस का नेतृत्व किया। 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में गोली मारकर उनकी हत्या की गई।पढ़ें →
महत्त्व

नमक यात्रा ने पूर्ण स्वराज की माँग को जन-आंदोलन बनाया और दुनिया को अहिंसक अवज्ञा की नैतिक शक्ति दिखाई।