तुग़लक़ सूबेदार दिल्ली भाग गया और वारंगल फिर तेलुगु शासन में लौट आया।
01पचहत्तर सरदार
प्रोलय नायक ने पहले तटीय क्षेत्र को मुक्त कराया और विलस दानपत्र में अपने कार्य का उल्लेख किया, जिसमें नए शासकों के अधीन हुए कष्टों और मन्दिरों तथा अग्रहारों के पुनःस्थापन की बात है। उनके बाद उनके चचेरे भाई कापय नायक ने सरदारों को वारंगल पर चढ़ाया। 1423 का कलुवचेरु दानपत्र इस अभियान में जुड़े पचहत्तर नायकों की गिनती करता है। सुल्तान का सूबेदार मलिक मक़बूल वारंगल छोड़कर उत्तर भाग गया; आगे चलकर वह दिल्ली में फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ का वज़ीर बना।
02व्यापक उभार
तेलुगु उभार उसी समय हुआ जब 1336 में विजयनगर की स्थापना हुई और दक्षिण में होयसल प्रतिरोध चल रहा था। उसी दशक में दक्षिण पर दिल्ली की पकड़ टूट गई, और 1347 में बहमनी राज्य भी उससे अलग हो गया। कापय नायक लगभग 1368 तक वारंगल से शासन करते रहे, जब बहमनियों ने उन्हें मार डाला। उनके साथ लड़ने वाले कोण्डवीडु के रेड्डी राजाओं ने तट पर तेलुगु शासन आगे चलाया।

दक्षिण में दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध पहला सफल हिन्दू उभार, और विजयनगर के संस्थापकों के लिए उदाहरण।
