कुरुक्षेत्र का महाभारत युद्ध

विजेतापाण्डव (7 अक्षौहिणी)युधिष्ठिर; सेनापति धृष्टद्युम्न; अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण
3138 ई.पू.बनाम
पक्षकौरव (11 अक्षौहिणी)दुर्योधन; सेनापति भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य

इतिहास-ग्रन्थ का महायुद्ध, जो कुरुओं के धर्मक्षेत्र में अठारह दिन चला। पहला बाण छूटने से पहले दोनों सेनाओं के बीच श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।

तिथि: परम्परागत गणना: लगभग 3138 ई.पू., कलियुग से 36 वर्ष पहलेस्थान: कुरुक्षेत्र, हरियाणाप्रकार: युद्ध
चित्र: Patron: 'Abd al-Rahim ibn Muhammad Bairam Khan Khan-i Khanan · CC0
परिणाम

अठारह दिनों में कौरव सेना नष्ट हुई और हस्तिनापुर में युधिष्ठिर का अभिषेक हुआ।

01अठारह दिन

महर्षि वेदव्यास के महाभारत में इस युद्ध के चार पर्व हैं, जो कौरवों के चार सेनापतियों के नाम पर हैं। भीष्म दस दिन तक लड़े, फिर शरशय्या पर लेट गए। द्रोण ने पाँच दिन सेना चलाई, कर्ण ने दो दिन, और अन्तिम दिन शल्य ने। रणभूमि में अठारह अक्षौहिणी सेना उतरी, सात पाण्डवों की और ग्यारह दुर्योधन की। तेरहवें दिन अभिमन्यु चक्रव्यूह में वीरगति को प्राप्त हुए। अठारहवें दिन द्वैपायन सरोवर पर भीम ने दुर्योधन की जंघा तोड़ी। व्यास से दिव्य दृष्टि पाकर संजय ने सारा युद्ध अन्धे राजा धृतराष्ट्र को सुनाया।

02परम्परा की तिथि

परम्परागत गणना के अनुसार श्रीकृष्ण 3102 ई.पू. में धराधाम से गए, उसी दिन कलियुग आरम्भ हुआ, और उससे पहले युधिष्ठिर युद्ध के बाद छत्तीस वर्ष राज कर चुके थे। इस हिसाब से युद्ध लगभग 3138 ई.पू. में हुआ। आधुनिक विद्वानों ने खगोल और पुरातत्त्व के आधार पर दूसरी तिथियाँ सुझाई हैं; हिन्दू परम्परा में परम्परागत तिथि ही मान्य है। थानेसर के पास ज्योतिसर में, जहाँ गीता कही गई मानी जाती है, आज भी तीर्थयात्री जाते हैं, और सूर्यग्रहण पर कुरुक्षेत्र के सरोवरों में स्नान के लिए भीड़ उमड़ती है।

श्रीकृष्ण
व्यक्तित्व · द्वापर युग का अंत; उनके प्रस्थान से कलियुग आरम्भ, 3102 ई.पू. (पारंपरिक गणना)श्रीकृष्णमथुरा में कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ जन्मे और गोकुल-वृन्दावन में नन्द-यशोदा के घर पले श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। उन्होंने द्वारका बसाई, पांडवों का साथ दिया, और कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया।पढ़ें →
महत्त्व

इस युद्ध के साथ द्वापर युग समाप्त हुआ, और इसकी रणभूमि में कही गई गीता सनातन धर्म का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला ग्रन्थ बनी।