इब्राहीम लोदी की सेना हारकर भागी; साँगा का एक हाथ कट गया और एक पैर से वे लँगड़े हो गए।
01राणा के घाव
मेवाड़ के इतिहास कहते हैं कि साँगा सबसे आगे लड़े और खातोली से लौटे तो तलवार से एक हाथ कट चुका था और तीर के घाव से वे लँगड़े हो गए थे। एक आँख वे युवावस्था में ही खो चुके थे। चारणों ने बाद में उनके शरीर पर अस्सी घाव गिने। इब्राहीम ने जल्दी ही दूसरी सेना भेजी, वह भी धौलपुर के पास हारी। इन विजयों से मेवाड़ का प्रभाव दिल्ली प्रदेश की सीमा तक पहुँच गया।
02स्रोत
खातोली मुख्यतः राजपूत स्रोतों से ज्ञात है, जिन्हें उन्नीसवीं सदी में कविराज श्यामलदास ने ‘वीर विनोद’ में और बाद में गौरीशंकर ओझा ने उदयपुर राज्य के इतिहास में संकलित किया। कुछ वर्ष बाद लिखने वाला बाबर साँगा को हिन्दुस्तान की दो सबसे बड़ी शक्तियों में गिनता है, जो उस राणा के चित्र से मेल खाता है जिसने लोदी सुल्तान को रणभूमि में हराया था। युद्ध का ठीक स्थान और वर्ष पूरी निश्चितता से तय नहीं है, और लोदियों के फ़ारसी इतिहास इस पराजय पर बहुत कम कहते हैं।

खातोली ने बाबर के आने से ठीक पहले साँगा को उत्तर भारत की प्रमुख शक्ति बना दिया।
