जम्मू-कश्मीर युद्ध, 1947–48

पक्षभारतभारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर राज्य की सेना
1947 ई.बनाम
पक्षपाकिस्तान समर्थित क़बायली लश्कर, बाद में पाकिस्तानी सेनापाकिस्तानी निर्देशन में लश्कर सरदार

स्वतंत्रता के दो महीने बाद पाकिस्तान से हथियारबंद क़बायली लश्करों ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण किया; महाराजा ने भारत में विलय किया, और अगली सुबह भारतीय सैनिक विमानों से श्रीनगर उतारे गए।

तिथि: अक्टूबर 1947 – जनवरी 1949 ई.स्थान: जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर, उरी, पुंछ, ज़ोजिलाप्रकार: अभियान
चित्र: Government of India · Public domain
परिणाम

भारत ने श्रीनगर, घाटी, जम्मू और लद्दाख बचा लिए; 1 जनवरी 1949 के युद्धविराम ने शेष भाग पाकिस्तानी क़ब्ज़े में छोड़ दिया।

01विलय और हवाई मार्ग

22 अक्टूबर 1947 को हज़ारों हथियारबंद क़बायली राज्य में घुसे और मुज़फ़्फ़राबाद ले लिया, रास्ते भर हत्या और लूट करते हुए। राज्य सेना के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह ने उन्हें दो दिन उरी में रोके रखा और वहीं वीरगति पाई। बारामुला में उन्होंने नगर लूटा। 26 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। 27 अक्टूबर को पहली सिख बटालियन श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी; यह दिन अब पैदल सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 3 नवंबर को बडगाम में मेजर सोमनाथ शर्मा की कंपनी ने लश्कर को रोके रखा; वे वीरगति को प्राप्त हुए और परमवीर चक्र पाने वाले पहले सैनिक बने।

02ज़ोजिला पर टैंक

7 नवंबर को भारतीय सेना ने शालटेंग में लश्कर को हराया और बारामुला व उरी वापस ले लिए। युद्ध जम्मू, नौशेरा, झंगड़ और पुंछ तक फैला; पुंछ एक वर्ष तक घिरा रहा और हवाई मार्ग से रसद पाता रहा। 1948 में पाकिस्तान की नियमित सेना लड़ाई में उतरी। नवंबर 1948 में भारतीय स्टुअर्ट टैंक लगभग 3,500 मीटर ऊँचे ज़ोजिला दर्रे के पार ले जाए गए ताकि कारगिल और लेह का रास्ता खुले, और उसी महीने पुंछ का घेरा टूटा। 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र के अधीन युद्धविराम लागू हुआ।

जम्मू-कश्मीर के डोगरा
राजवंश · 1822–1952 ई. (1846 से जम्मू-कश्मीर के महाराजा)जम्मू-कश्मीर के डोगरारणजीत सिंह की सेवा में रहे डोगरा राजपूत गुलाब सिंह 1822 में जम्मू के राजा और 1846 की अमृतसर सन्धि से जम्मू-कश्मीर के महाराजा बने। उनके सेनापति ज़ोरावर सिंह डोगरा झण्डा लद्दाख पार तिब्बत के छोर तक ले गए, और उनके प्रपौत्र हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में राज्य को भारत में मिलाने के पत्र पर हस्ताक्षर किए।पढ़ें →
महत्त्व

स्वतंत्र भारत के पहले युद्ध ने तय किया कि घाटी, जम्मू और लद्दाख भारत में रहेंगे, और क़ब्ज़े वाले भाग पर वह विवाद छोड़ गया जो आज तक चल रहा है।