भारत ने श्रीनगर, घाटी, जम्मू और लद्दाख बचा लिए; 1 जनवरी 1949 के युद्धविराम ने शेष भाग पाकिस्तानी क़ब्ज़े में छोड़ दिया।
01विलय और हवाई मार्ग
22 अक्टूबर 1947 को हज़ारों हथियारबंद क़बायली राज्य में घुसे और मुज़फ़्फ़राबाद ले लिया, रास्ते भर हत्या और लूट करते हुए। राज्य सेना के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह ने उन्हें दो दिन उरी में रोके रखा और वहीं वीरगति पाई। बारामुला में उन्होंने नगर लूटा। 26 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। 27 अक्टूबर को पहली सिख बटालियन श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरी; यह दिन अब पैदल सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 3 नवंबर को बडगाम में मेजर सोमनाथ शर्मा की कंपनी ने लश्कर को रोके रखा; वे वीरगति को प्राप्त हुए और परमवीर चक्र पाने वाले पहले सैनिक बने।
02ज़ोजिला पर टैंक
7 नवंबर को भारतीय सेना ने शालटेंग में लश्कर को हराया और बारामुला व उरी वापस ले लिए। युद्ध जम्मू, नौशेरा, झंगड़ और पुंछ तक फैला; पुंछ एक वर्ष तक घिरा रहा और हवाई मार्ग से रसद पाता रहा। 1948 में पाकिस्तान की नियमित सेना लड़ाई में उतरी। नवंबर 1948 में भारतीय स्टुअर्ट टैंक लगभग 3,500 मीटर ऊँचे ज़ोजिला दर्रे के पार ले जाए गए ताकि कारगिल और लेह का रास्ता खुले, और उसी महीने पुंछ का घेरा टूटा। 1 जनवरी 1949 को संयुक्त राष्ट्र के अधीन युद्धविराम लागू हुआ।

स्वतंत्र भारत के पहले युद्ध ने तय किया कि घाटी, जम्मू और लद्दाख भारत में रहेंगे, और क़ब्ज़े वाले भाग पर वह विवाद छोड़ गया जो आज तक चल रहा है।
