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त्रिपुर सुन्दरी मन्दिर, उदयपुर

त्रिपुरा की माताबाड़ी, कछुए की पीठ जैसी नीची पहाड़ी पर एक शक्तिपीठ, जिसे महाराज धन्य माणिक्य ने 1501 ई. में बनवाया। परम्परा के अनुसार यहाँ माता सती का दायाँ चरण गिरा था।

निर्माण: 1501 ई., महाराज धन्य माणिक्यस्थान: त्रिपुरादेवता: देवी त्रिपुर सुन्दरी23.51° N, 91.50° E
  1. 1501 ई.
चित्र: Yash raina · CC BY-SA 4.0

01कूर्म पीठ

पहाड़ी कूर्म पीठ कहलाती है क्योंकि उसका आकार कछुए के कूबड़ जैसा है। त्रिपुरा के माणिक्य राजाओं की मान्यता थी कि देवी ने स्वप्न में धन्य माणिक्य से कहा कि उनकी मूर्ति चटगाँव से लाकर यहाँ स्थापित करें। इस स्थान पर विष्णु मन्दिर की योजना थी; वह देवी का मन्दिर बन गया। गर्भगृह में काले कष्टि पत्थर की दो मूर्तियाँ हैं, बड़ी त्रिपुर सुन्दरी और छोटी छोटीमाँ, जिन्हें राजा युद्ध में साथ ले जाते थे।

02माताबाड़ी की दीवाली

मन्दिर ईंट का चौकोर घन है, जिस पर बंगाली चाला छत और एक कलश है, वही रूप जो बंगाल और त्रिपुरा अपने देवालयों में अपनाते थे। पूर्व की ओर का कल्याण सागर सरोवर बड़े कछुओं से भरा है, जिन्हें यात्री खिलाते हैं। दीवाली पर गोमती तट पर बसी पुरानी माणिक्य राजधानी उदयपुर में कई दिन का मेला लगता है, और सरोवर पर जलते दीये ही लोग देखने आते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1501 ई.महाराज धन्य माणिक्य मन्दिर बनवाकर देवी की स्थापना करते हैं।
दर्शन और यात्रा

उदयपुर, गोमती ज़िला, अगरतला से 55 किमी दक्षिण; अगरतला–सबरूम रेललाइन पर उदयपुर स्टेशन है।