01वेट्टारु पर नाव
वेट्टारु, जिसे मुल्लि या अगस्त्य कावेरी भी कहते हैं, मन्दिर के पश्चिम में बहती है। कथा कहती है कि सम्बन्दर आए तब नदी में बाढ़ थी और खेने वाला कोई न था; वे भक्तों के साथ नाव में बैठे, पदिगम गाया, और नाव पार चली गई। दूसरे तट पर सम्बन्दर का देवालय है, और ओडम उत्सव, नाव का उत्सव, ऐप्पसि की अमावस्या को होता है। पञ्च अरण्य यानी पाँच वन: तिरुक्करुकावूर में मुल्लैवनम, अवलिवनल्लूर में पादिरिवनम, हरिद्वारमंगलम में वन्निवनम, आलंगुडि में पूलैवनम और यहाँ विल्ववनम।
कुडवासल से लगभग 5 किमी; कुडवासल–कोरडाच्चेरि मार्ग पर सेल्लूर से मोड़ लें। ऐप्पसि अमावस्या के ओडम उत्सव पर आएँ।




