आज भी खड़ा

विल्वारण्येश्वरर मन्दिर, तिरुक्कोल्लम्पुदूर

बेल-वन का धाम, कावेरी डेल्टा के पाँच पञ्च अरण्य मन्दिरों में एक। यहीं सम्बन्दर ने पदिगम गाया और उन्हें तथा उनके भक्तों को ले जाती नाव बाढ़ भरी नदी पार कर गई।

निर्माण: वेट्टारु (मुल्लि नदी) के तट पर चोल देश का मन्दिरस्थान: तमिलनाडु (तिरुवारूर ज़िला, कुडवासल के पास)देवता: भगवान शिव विल्वारण्येश्वरर (विल्ववननाथर) रूप में; देवी सौन्दरनायकी (अऴगु नाच्चियार)10.81° N, 79.46° E
चित्र: பா.ஜம்புலிங்கம் · CC BY-SA 4.0

01वेट्टारु पर नाव

वेट्टारु, जिसे मुल्लि या अगस्त्य कावेरी भी कहते हैं, मन्दिर के पश्चिम में बहती है। कथा कहती है कि सम्बन्दर आए तब नदी में बाढ़ थी और खेने वाला कोई न था; वे भक्तों के साथ नाव में बैठे, पदिगम गाया, और नाव पार चली गई। दूसरे तट पर सम्बन्दर का देवालय है, और ओडम उत्सव, नाव का उत्सव, ऐप्पसि की अमावस्या को होता है। पञ्च अरण्य यानी पाँच वन: तिरुक्करुकावूर में मुल्लैवनम, अवलिवनल्लूर में पादिरिवनम, हरिद्वारमंगलम में वन्निवनम, आलंगुडि में पूलैवनम और यहाँ विल्ववनम।

दर्शन और यात्रा

कुडवासल से लगभग 5 किमी; कुडवासल–कोरडाच्चेरि मार्ग पर सेल्लूर से मोड़ लें। ऐप्पसि अमावस्या के ओडम उत्सव पर आएँ।