01रानी वासटा का मंदिर
स्थल पर मिला एक शिलालेख बताता है कि मंदिर मौखरि राजा सूर्यवर्मन की पुत्री वासटा ने अपने पति, पाण्डुवंशी राजा हर्षगुप्त की स्मृति में, अपने पुत्र महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासन में बनवाया। आधुनिक नाम के बावजूद यह विष्णु मंदिर है। इसका शिखर पूरी तरह बारीक ढली ईंटों का है, जिसमें मिट्टी में ही गवाक्ष, कमल-पट्टियाँ और छोटे मंदिर काटे गए हैं; पत्थर की चौखट पर विष्णु के अवतार और शेषशायी विष्णु हैं। यह लगभग 1,300 वर्ष से खड़ा है।
02मिट्टी के नीचे नगर
1950 के दशक में और फिर लगभग 2000 से 2011 तक हुई खुदाई में पूरा नगर निकला: शैव और वैष्णव मंदिर, एक दर्जन बौद्ध विहार, जैन मंदिर, अन्न-भंडारों वाला बड़ा बाज़ार, और महानदी पर स्नान-घाट। स्वयं शैव महाशिवगुप्त के शासन में ये सब साथ-साथ रहे। नदी किनारे का गंधेश्वर मंदिर आज भी पूजा में है, जो कुछ पुराने नक्काशीदार पत्थरों से बना है। लगता है श्रीपुर नगर भूकंप और बाढ़ के बाद उजड़ गया।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 7वीं शताब्दीमहाशिवगुप्त बालार्जुन के शासन में रानी वासटा ने ईंटों का लक्ष्मण मंदिर बनवाया।
- 1950 का दशकसिरपुर में पहली खुदाई।
- लगभग 2000–2011बड़ी खुदाई में मंदिर, विहार और बाज़ार निकले।
रायपुर से लगभग 80 किमी उत्तर-पूर्व, महानदी तट पर। सिरपुर महोत्सव सर्दियों में होता है।




