01रेसकोर्स के पास का मन्दिर
रमना कालीबाड़ी पुराने रमना रेसकोर्स, आज के सुहरावर्दी उद्यान, के दक्षिण में थी। ढाका की परम्परा कहती है कि इसे हिमालय से उतरे काली-भक्तों ने स्थापित किया, और यह मुग़ल और कम्पनी काल में खड़ी रही। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में भावल के राजा राजेन्द्र नारायण की पत्नी रानी बिलासमणि देवी के संरक्षण में इसका भव्य पुनर्निर्माण हुआ, और इसका शिखर लगभग 120 फ़ुट ऊँचा उठा। सामने एक बड़ा तालाब था। पास ही श्री आनन्दमयी माँ का आश्रम था, जो 1920 के दशक में ढाका में रहीं। 7 मार्च 1971 को रेसकोर्स पर शेख़ मुजीबुर रहमान के भाषण के चित्रों में मन्दिर दिखता है।
0227 मार्च 1971
25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तानी सेना ने ढाका में ऑपरेशन सर्चलाइट आरम्भ किया। 27 मार्च को सैनिक रमना काली मन्दिर और आनन्दमयी आश्रम में घुसे, जहाँ हिन्दू परिवारों और कुछ मुसलमानों ने शरण ली थी, और लगभग एक घण्टे में सौ से अधिक लोगों को मार डाला; फिर मन्दिर और आश्रम को उड़ाकर जला दिया गया। 2000 में न्यायमूर्ति के. एम. सोभान की अध्यक्षता में खुली जाँच ने बचे लोगों की गवाही सुनी। स्वतन्त्रता के बाद भक्तों ने उसी स्थान पर एक छोटे देवस्थान में पूजा चालू रखी। भारत के सहयोग से हुए पूर्ण पुनर्निर्माण का लोकार्पण राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 17 दिसम्बर 2021 को किया।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 20वीं शताब्दी का आरम्भभावल की रानी बिलासमणि देवी के संरक्षण में मन्दिर का भव्य पुनर्निर्माण होता है।
- 27 मार्च 1971पाकिस्तानी सेना मन्दिर में शरण लिए लोगों को मारती है और मन्दिर ध्वस्त करती है।
- 2000नरसंहार की सार्वजनिक जाँच आरम्भ होती है।
- 17 दिसम्बर 2021पुनर्निर्मित मन्दिर का लोकार्पण होता है।
ढाका में बांग्ला अकादमी के सामने, सुहरावर्दी उद्यान के दक्षिण में। काली पूजा और दुर्गा पूजा पर बड़ी भीड़ रहती है।




