आज भी खड़ा

प्रासात फनोम रुंग

उत्तर-पूर्व थाईलैण्ड में एक बुझे ज्वालामुखी के किनारे शिव का ख्मेर मन्दिर, धरती पर कैलास के रूप में बना, जहाँ तक नाग-सेतुओं वाला शोभायात्रा-मार्ग चढ़ता है। अनन्त पर सोए विष्णु वाला इसका प्रसिद्ध शिलापट्ट 1960 के दशक में चुराया गया और 1988 में शिकागो से लौटा।

निर्माण: 10वीं–13वीं शताब्दी; मुख्य देवालय 12वीं शताब्दी के आरम्भ में क्षेत्र के ख्मेर सामन्त नरेन्द्रादित्य के समयस्थान: बुरीराम प्रान्त, ईसान, Thailandदेवता: भगवान शिव14.53° N, 102.94° E
  1. 10वीं शताब्दी
  2. 12वीं शताब्दी का आरम्भ
  3. 1971–1988
  4. 1988
चित्र: Philip Nalangan · CC BY-SA 4.0

01ज्वालामुखी पर कैलास

ख्मेर में फनोम रुंग का अर्थ बड़ा पर्वत है, और निर्माताओं ने इस बुझे ज्वालामुखी को कैलास माना। 10वीं शताब्दी में यहाँ ईंटों के देवालय थे; बलुआ पत्थर का बड़ा देवालय 12वीं शताब्दी के आरम्भ में अंकोर के राजाओं के सम्बन्धी स्थानीय सामन्त नरेन्द्रादित्य के समय बना, जिनके पुत्र हिरण्य ने एक शिलालेख में उनके कर्म दर्ज किए। कमल-कलिका स्तम्भों से सजा 160 मीटर का मार्ग तीन नाग-सेतुओं तक जाता है और पाँच सोपान-पंक्तियाँ चढ़कर द्वार तक। भीतरी द्वार के ऊपर शिव नटराज नाचते हैं; अन्य शिलापट्टों पर नागपाश में बँधे राम-लक्ष्मण, गोवर्धन उठाते कृष्ण, और अग्नि के पास बैठे ऋषि हैं।

02घर लौटा शिलापट्ट

पूर्वी मण्डप के ऊपर का शिलापट्ट अनन्त पर लेटे विष्णु को दिखाता है, जिनकी नाभि से ब्रह्मा उठ रहे हैं। 1960 के दशक में यह स्थल से ग़ायब हुआ और शिकागो के आर्ट इंस्टिट्यूट में मिला। थाईलैण्ड में लम्बा जन-अभियान चला, और 1988 में शिलापट्ट लौटकर अपने स्थान पर लगा, उसी वर्ष जब ललित कला विभाग ने सत्रह वर्ष का जीर्णोद्धार पूरा किया और 21 मई को उद्यान खोला गया। वर्ष में चार बार उगता या डूबता सूर्य देवालय के पन्द्रहों द्वारों से सीधा चमकता है, और अप्रैल में हज़ारों लोग इसे देखने जुटते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 10वीं शताब्दीपहाड़ी पर पहले ईंटों के देवालय बनते हैं।
  2. 12वीं शताब्दी का आरम्भनरेन्द्रादित्य के समय बलुआ पत्थर का मुख्य देवालय बनता है।
  3. 1971–1988ललित कला विभाग मन्दिर का जीर्णोद्धार करता है।
  4. 1988शयन विष्णु शिलापट्ट शिकागो से लौटता है; 21 मई को उद्यान खुलता है।
दर्शन और यात्रा

बुरीराम नगर से लगभग 65 किमी दक्षिण। जल्दी जाएँ; अप्रैल और सितम्बर में द्वारों से सूर्य वाले दिनों में भारी भीड़ होती है।