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महेश्वरनाथ मन्दिर, त्रियोले

मॉरीशस का सबसे बड़ा हिन्दू मन्दिर, त्रियोले का ‘ग्राण्ड शिवाला’, जिसे 1888 में कलकत्ता से आए एक पण्डित ने स्थापित किया। यह द्वीप के पवित्र सरोवर गंगा तालाब की पहली तीर्थयात्रा से जुड़ा है।

निर्माण: 1888 में पण्डित संजीवनलाल रामसुन्दर द्वारा स्थापितस्थान: त्रियोले, पाम्पलमूस ज़िला, Mauritiusदेवता: भगवान शिव, महेश्वरनाथ रूप में-20.04° N, 57.55° E
  1. 4 अप्रैल 1866
  2. 1888
चित्र: Karsten Ratzke · CC0

01पण्डित संजीवन

मॉरीशस के अधिकांश हिन्दू उन गिरमिटिया मज़दूरों के वंशज हैं जो 1834 के बाद चीनी कोठियों पर काम करने आए। संजीवनलाल रामसुन्दर, जिन्हें पण्डित संजीवन के नाम से याद किया जाता है, 4 अप्रैल 1866 को कलकत्ता से फेरीवाले के रूप में आए। 19वीं शताब्दी के अन्त में कोठियाँ छोटे टुकड़ों में भूमि बेचने लगीं, और उन्होंने आज के त्रियोले का बड़ा भाग ख़रीदा। 1888 में उन्होंने वहाँ शिव मन्दिर स्थापित किया और उसके लिए भूमि दी। महेश्वरनाथ के मुख्य देवालय के चारों ओर गणेश, मुरुगन, विष्णु, कृष्ण, राम और दुर्गा के मन्दिर हैं, सो पूरा परिसर देवताओं का समागम है।

02गंगा तालाब का मार्ग

मन्दिर 19वीं शताब्दी के अन्त में ग्राण्ड बासें की पहली तीर्थयात्रा से जुड़ा है, द्वीप की पहाड़ियों का वह ज्वालामुखी सरोवर जिसे मॉरीशस के हिन्दू गंगा तालाब कहते हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों लोग काँवर लेकर, दर्पणों और फूलों से सजे बाँस के ढाँचे, सरोवर तक पैदल जाते हैं ताकि लिंग के लिए उसका जल लाएँ, और बहुत से त्रियोले के शिवाले से निकलते या उसके पास से गुज़रते हैं। शिवरात्रि की रात मन्दिर जगमगाता है और आँगन भोर तक भरा रहता है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 4 अप्रैल 1866पण्डित संजीवनलाल कलकत्ता से मॉरीशस आते हैं।
  2. 1888वे त्रियोले में महेश्वरनाथ मन्दिर स्थापित करते हैं।
दर्शन और यात्रा

त्रियोले, पोर्ट लुई से ग्राण्ड बे की ओर मुख्य मार्ग पर। महाशिवरात्रि (फ़रवरी–मार्च) सबसे बड़ा उत्सव है।