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वेण्णि करुम्बेश्वरर मन्दिर, तिरुवेण्णियूर (कोयिल वेण्णि)

गन्ने के डण्ठलों के गट्ठर जैसा लिंग, उस मैदान के पास जहाँ करिकाल चोल ने वेण्णि का युद्ध जीता। अप्पर और सम्बन्दर ने इसे गाया।

निर्माण: सादा पुराना चोल मन्दिर, कोच्चेंगट चोल के माडक्कोयिलों में गिना जाता है; नगरत्तारों द्वारा जीर्णोद्धारस्थान: तमिलनाडु (तिरुवारूर ज़िला)देवता: भगवान शिव करुम्बेश्वरर (वेण्णि करुम्बर) रूप में; देवी सौन्दर्य नायकी (अऴगिय नायकी)10.79° N, 79.36° E
चित्र: Nittavinoda · CC BY-SA 4.0

01गन्ना और वेण्णि

करुम्बु गन्ना है, और यहाँ का लिंग बँधे हुए गन्ने के डण्ठलों के गट्ठर जैसा दिखता है। मधुमेह के रोगी स्वामी को चीनी चढ़ाते हैं। वेण्णि संगम कविताओं का वेण्णि परन्तलै है, जहाँ करिकाल चोल ने चेर और पाण्ड्य राजाओं को हराया; पुऱनानूरु बताता है कि पीठ पर घाव खाए चेर पेरुंचेरल आदन लज्जा के साथ जीने के बजाय प्राण त्यागने बैठ गए। कहते हैं करिकाल युद्धों से पहले गाँव की पिडारि की पूजा करते थे, और एक परम्परा पहला मन्दिर उन्हीं का बनवाया मानती है। मन्दिर सादा है, इसके स्तम्भ और दीवारें लगभग बिना नक्काशी के हैं।

दर्शन और यात्रा

नीडामंगलम से तंजावूर की ओर लगभग 8 किमी: कोयिल वेण्णि स्टॉप पर उतरकर लगभग 2 किमी उत्तर जाएँ।