आज भी खड़ा

रामलिंगेश्वर मन्दिर, कीसरगुट्टा

हैदराबाद के किनारे पहाड़ी मन्दिर, जहाँ मन्दिर के अनुसार श्रीराम ने लिंग स्थापित किया और काशी से लिंग लेकर देर से आए हनुमान जी ने उन्हें पहाड़ी पर बिखेर दिया। पहाड़ी पर विष्णुकुण्डिन काल की बस्ती के उत्खनित अवशेष भी हैं।

निर्माण: परम्परा के अनुसार श्रीराम से जुड़ा मन्दिर; पहाड़ी पर विष्णुकुण्डिन काल के अवशेष, 4थी–5वीं शताब्दीस्थान: तेलंगाना (मेडचल–मल्काजगिरि जिला)देवता: भगवान शिव रामलिंगेश्वर, भवानी और शिवदुर्गा के साथ17.52° N, 78.67° E
  1. 4थी–6ठी शताब्दी
चित्र: Kssk1967 · CC BY-SA 4.0

01हनुमान जी की पहाड़ी

मन्दिर की कथा कहती है कि लंका युद्ध के बाद श्रीराम रावण-वध के प्रायश्चित के लिए यहाँ शिव की पूजा करना चाहते थे और उन्होंने हनुमान जी को लिंग लाने काशी भेजा। हनुमान जी एक सौ एक लिंग लेकर लौटे, पर मुहूर्त निकल चुका था और श्रीराम एक लिंग स्थापित कर चुके थे। निराशा में हनुमान जी ने लिंग पहाड़ी पर फेंक दिए, और आज भी अनेक छोटे लिंग वहाँ बिखरे पड़े हैं। उन्हें सान्त्वना देने के लिए श्रीराम ने पहाड़ी का नाम केसरी-पुत्र हनुमान पर रखा: केसरगिरि, आज का कीसर।

02उत्खनित अतीत

राज्य पुरातत्व विभाग के उत्खनन में पहाड़ी पर विष्णुकुण्डिन वंश की ईंटों की संरचनाएँ, सिक्के और मिट्टी के बर्तन मिले, जिसने 4थी–6ठी शताब्दी में दक्कन पर राज किया; स्थल संरक्षित है। महाशिवरात्रि बड़ा उत्सव है, जब हैदराबाद और आसपास के गाँवों से लाखों लोग पहाड़ी पर चढ़ते हैं, और रास्ते में पड़े छोटे लिंगों पर रुक-रुककर जल चढ़ाते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 4थी–6ठी शताब्दीपहाड़ी पर विष्णुकुण्डिन काल की बस्ती।
दर्शन और यात्रा

हैदराबाद से ईसीआईएल और कीसर होकर लगभग 35 किमी उत्तर-पूर्व।