01कपिल की पहाड़ी
पहाड़ी का नाम महर्षि कपिल से पड़ा, जिन्होंने यहाँ तप किया बताया जाता है। चोटी पर चन्द्रशेखर का मन्दिर, अपने अभिलेख के अनुसार, 1246 में पूर्वी गंग वंश के नरसिंह देव प्रथम के समय बना; पहाड़ी पर एक पुराने शिव देवालय को बुढ़ा लिंग, अर्थात पुराना लिंग, कहते हैं। यात्री 1,352 सीढ़ियाँ चढ़ते हैं, या वन से घूमती सड़क से ऊपर जाते हैं। पहाड़ी और उसका वन कपिलास वन्यजीव अभयारण्य के रूप में संरक्षित हैं, और नीचे प्रायः हाथी दिखते हैं।
02पहाड़ी पर शिवरात्रि
महाशिवरात्रि कपिलास की बड़ी रात है: लाखों लोग दीपक लेकर अँधेरे में चढ़ते हैं, और आधी रात को शिखर पर महादीप चढ़ाया जाता है। श्रावण में ओडिशा के काँवड़िये महानदी और ब्राह्मणी का जल लिंग पर चढ़ाने लाते हैं। ओडिशा के बहुत से शिव मन्दिरों की तरह परिसर में विष्णु का देवालय भी है, ताकि एक ही चोटी पर दोनों का सम्मान हो।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1246 ई.मन्दिर के अभिलेख के अनुसार नरसिंह देव प्रथम के समय चन्द्रशेखर मन्दिर बनता है।
ढेंकानाल से लगभग 26 किमी और भुवनेश्वर से 90 किमी। चोटी तक सीढ़ियाँ या सड़क; शिवरात्रि पर बहुत भीड़ होती है।




