01शिव प्रसाद गुप्त की भेंट
बनारस के बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने अपने परिवार की सम्पत्ति स्वतन्त्रता आन्दोलन में लगा दी। उन्होंने 1921 में असहयोग आन्दोलन में सरकारी कॉलेज छोड़ने वाले विद्यार्थियों के लिए काशी विद्यापीठ बनाया, हिन्दी दैनिक आज आरम्भ किया, और 1918 से 1924 के बीच यह मन्दिर बनवाया। काम का मार्गदर्शन दुर्गा प्रसाद खत्री ने किया; गुप्त जी की इच्छा से इसे बनाने वाले तीस कारीगरों और पच्चीस राजमिस्त्रियों के नाम हॉल में एक पट्टिका पर खुदे हैं। फ़र्श के बीच मकराना संगमरमर में भारत लेटा है: हिमालय और उसकी चोटियाँ, मैदान और पठार, नदियाँ और सागर, अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान से बर्मा और लंका तक, उभार में और नाप के अनुसार तराशे हुए।
02गांधी जी का उद्घाटन
महात्मा गांधी ने 25 अक्टूबर 1936 को सरदार वल्लभभाई पटेल और ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के साथ मन्दिर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यहाँ देवी-देवताओं की मूर्तियाँ नहीं, केवल संगमरमर पर उभरा भारत का मानचित्र है, और आशा की कि यह मन्दिर हर धर्म और हर जाति के लोगों का मिलन-स्थल बनेगा। दर्शनार्थी मानचित्र के चारों ओर की दीर्घा में चलते हैं और धरती को मानो आकाश से देखते हैं; स्कूली बच्चे गंगोत्री से सागर तक गंगा की धारा पर उँगली फेरते हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1918–1924शिव प्रसाद गुप्त मन्दिर और उसका संगमरमर का मानचित्र बनवाते हैं।
- 25 अक्टूबर 1936महात्मा गांधी भारत माता मन्दिर का उद्घाटन करते हैं।
मन्दिर काशी विद्यापीठ परिसर में है, वाराणसी कैंट स्टेशन से लगभग 2 किमी। पूरा मानचित्र एक साथ देखने के लिए ऊपर की दीर्घा में जाएँ।




