01तूतीकोरिन के जहाज़
वल्लिनायगम उलगनाथन चिदंबरम पिल्लै का जन्म तिरुनेलवेली के पास ओट्टपिडारम में हुआ और वे तूतीकोरिन में वकालत करते थे। तूतीकोरिन और कोलंबो के बीच जहाज़ी व्यापार ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी के हाथ में था। अक्टूबर 1906 में उन्होंने भारतीय अंशधारकों के साथ स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी पंजीकृत कराई और दो जहाज़, ‘गैलिया’ और ‘लावो’, ख़रीदे। अंग्रेज़ी कंपनी ने उन्हें डुबाने के लिए किराया लगभग शून्य कर दिया और अफ़सरों ने व्यापारियों पर दबाव डाला, फिर भी स्वदेशी जहाज़ चलते रहे। 1908 के आरंभ में उन्होंने और सुब्रमण्य शिवा ने तूतीकोरिन की अंग्रेज़ी कोरल मिल्स में हड़ताल का नेतृत्व किया।
02कोयंबटूर जेल का कोल्हू
12 मार्च 1908 को उन्हें गिरफ़्तार किया गया और अगले दिन तिरुनेलवेली में दंगा भड़क उठा। जुलाई 1908 में उन्हें दो आजीवन कालापानी की सज़ा मिली, जो अपील पर घटी। कोयंबटूर जेल में उन्हें बैल की तरह कोल्हू में जोता गया, इसीलिए तमिलनाडु उन्हें ‘सेक्किऴुत्त सेम्मल’ भी कहता है। दिसंबर 1912 में छूटे तो कंपनी बंद हो चुकी थी और वकालत छिन चुकी थी। बाद में उन्होंने तिरुक्कुरल और तोलकाप्पियम पर तमिल टीकाएँ लिखीं, और 18 नवंबर 1936 को तूतीकोरिन में उनका देहांत हुआ। तूतीकोरिन बंदरगाह आज वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट कहलाता है।


