01गढ़ा की संरक्षिका
दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर में, खजुराहो के निर्माता चंदेलों के वंश में हुआ। उनका विवाह गढ़ा-मंडला के गोंड राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ। लगभग 1550 में दलपत शाह का देहांत हुआ और वे पुत्र वीर नारायण की ओर से राज चलाने लगीं। अबुल फ़ज़ल उनके राज्य को समृद्ध बताता है, जिसमें हज़ारों गाँव और युद्ध-हाथियों की बड़ी सेना थी। उन्होंने सिंगौरगढ़ से राज चलाया, सतपुड़ा की पहाड़ियों में चौरागढ़ को अपना गढ़ बनाए रखा, जबलपुर के आसपास जलाशय बनवाए, जिनमें रानीताल आज भी उनका नाम लिए है, और मालवा के बाज़ बहादुर के धावे लौटाए।
02नरई, 24 जून 1564
1564 में कड़ा के मुग़ल हाकिम आसफ़ खाँ ने बड़ी सेना लेकर गढ़ा पर चढ़ाई की। दुर्गावती हाथी पर सवार होकर रण में उतरीं और नरई की संकरी घाटी में पहले दिन की लड़ाई जीतीं। अगले दिन मुग़ल तोपें आ पहुँचीं और बाढ़ से भरे नाले ने पीछे हटने का रास्ता काट दिया; उनकी आँख और गर्दन में तीर लगे। बंदी होने के बजाय उन्होंने अपनी कटार अपने सीने में उतार ली। कुछ ही समय बाद वीर नारायण चौरागढ़ की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हुए। जबलपुर के पास बरेला में उनकी समाधि है, और मध्य प्रदेश में 24 जून उनके बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।





