01इंपीरियल इंस्टीट्यूट, 1 जुलाई 1909
उनका जन्म अमृतसर के एक संपन्न, राजभक्त परिवार में हुआ और 1906 में वे यूनिवर्सिटी कॉलेज में इंजीनियरिंग पढ़ने लंदन गए। इंडिया हाउस में वे सावरकर के संपर्क में आए। 1 जुलाई 1909 की शाम साउथ केंसिंग्टन के इंपीरियल इंस्टीट्यूट में नेशनल इंडियन एसोसिएशन की सभा में उन्होंने भारत सचिव के राजनीतिक सहायक सर विलियम हट कर्ज़न वायली को गोली मारी। बीच में आए पारसी चिकित्सक कावस लालकाका भी मारे गए। ढींगरा ने भागने का कोई प्रयास नहीं किया। उनके परिवार ने सार्वजनिक रूप से उनसे नाता तोड़ लिया।
02मुक़दमा और पेंटनविल
23 जुलाई 1909 को ओल्ड बेली में उनका मुक़दमा चला। उन्होंने न्यायालय का अपने ऊपर मुक़दमा चलाने का अधिकार ही मानने से इनकार किया और उन्हें मृत्युदंड मिला। उनके पास से मिला लिखित वक्तव्य, जिसे पुलिस ने दबा रखा था, फाँसी के अगले दिन ‘डेली न्यूज़’ ने छापा; उसमें उन्होंने कहा था कि उनके देश पर आघात उनके धर्म पर आघात है। 17 अगस्त 1909 को पच्चीस वर्ष की आयु में पेंटनविल में उन्हें फाँसी दी गई और जेल में ही दफ़नाया गया। 1976 में उनके अवशेष भारत लाए गए।

