जिसे उन्होंने अधिमानस का अवतरण कहा, उस अनुभूति के बाद श्री अरविन्द एकान्त में चले गए और उनके चारों ओर बने आश्रम का मार्गदर्शन श्री माँ को सौंप दिया।