जिनका ‘वेंकटेश सुप्रभातम्’ हर सुबह तिरुमला को जगाता है, उन कर्नाटक गायिका का जन्म मदुरै में हुआ। 1998 में वे भारत रत्न पाने वाली पहली संगीतज्ञ बनीं।