पहाड़ों से होकर कम्पनी की सड़क के विरुद्ध चार वर्ष युद्ध करने वाले नोंगख्लाव के खासी सरदार का ढाका में बंदी अवस्था में निधन हुआ। मेघालय यह दिन तिरोत सिंह दिवस के रूप में मनाता है।