केरल सम्प्रदाय के खगोलविद् का जन्म; उन्होंने स्वयं अपना जन्म कलि-दिन 16,60,181 बताया है। 1500 का उनका तन्त्रसंग्रह आर्यभट से चली आ रही ग्रह-गति की पद्धति को संशोधित करता है।