‘महान मुक़दमे’ में गांधी जी ने ‘यंग इंडिया’ के लेखों पर राजद्रोह का आरोप स्वीकार कर सबसे कड़ी सज़ा माँगी। न्यायाधीश ब्रूमफ़ील्ड ने तिलक की तरह छह वर्ष की सज़ा दी।