हुमायूँ अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से फिसले और तीन दिन बाद चल बसे; पीछे तेरह वर्ष के अकबर रह गए। इसी उथल-पुथल ने उसी वर्ष हेमू के दिल्ली अभियान का रास्ता खोला।