गोरखपुर में मुकुन्द लाल घोष का जन्म हुआ। परमहंस योगानन्द के रूप में वे क्रियायोग को अमेरिका ले गए, और उनकी ‘योगी कथामृत’ आज भी संसार भर में पढ़ी जाती है।