उपा॑स्मै गायता नर॒ः पव॑माना॒येन्द॑वे ।
अ॒भि दे॒वाँ इय॑क्षते
upāsmai gāyatā naraḥ pavamānāyendave |
abhi devām̐ iyakṣate
ऋषि: कश्यपोऽसितो देवलो वा · देवता: पवमानः सोमः · छन्द: गायत्री
9 श्लोक · 11 में से 114
कश्यप असित अथवा देवल गायत्री में पवमान सोम के लिए गाने को कहते हैं। अथर्वाओं ने उसके रस को मधु और दूध से मिलाया है। सोम से प्रार्थना है कि वह गौ, मनुष्य, अश्व और ओषधियों के लिए कल्याणकारी होकर बहे। भूरे, अरुण, द्युलोक को छूने वाले सोम के लिए गाथा गाई जाती है। ऋत्विजों से कहा जाता है कि हाथ से चलाए पत्थरों से अभिषुत सोम को शुद्ध करें, मधु में मधु डालें, उसे दधि से मिलाएँ और इन्दु को इन्द्र में रखें। शत्रुनाशक, मन का स्वामी सोम इन्द्र के हर्ष के लिए सींचा जाता है, और इन्द्र के साथ वीरों से युक्त धन माँगा जाता है।
उपा॑स्मै गायता नर॒ः पव॑माना॒येन्द॑वे ।
अ॒भि दे॒वाँ इय॑क्षते
upāsmai gāyatā naraḥ pavamānāyendave |
abhi devām̐ iyakṣate
अ॒भि ते॒ मधु॑ना॒ पयोऽथ॑र्वाणो अशिश्रयुः ।
दे॒वं दे॒वाय॑ देव॒यु
abhi te madhunā payo'tharvāṇo aśiśrayuḥ |
devaṃ devāya devayu
स न॑ः पवस्व॒ शं गवे॒ शं जना॑य॒ शमर्व॑ते ।
शं रा॑ज॒न्नोष॑धीभ्यः
sa naḥ pavasva śaṃ gave śaṃ janāya śamarvate |
śaṃ rājannoṣadhībhyaḥ
ब॒भ्रवे॒ नु स्वत॑वसेऽरु॒णाय॑ दिवि॒स्पृशे॑ ।
सोमा॑य गा॒थम॑र्चत
babhrave nu svatavase'ruṇāya divispṛśe |
somāya gāthamarcata
हस्त॑च्युतेभि॒रद्रि॑भिः सु॒तं सोमं॑ पुनीतन ।
मधा॒वा धा॑वता॒ मधु॑
hastacyutebhiradribhiḥ sutaṃ somaṃ punītana |
madhāvā dhāvatā madhu
नम॒सेदुप॑ सीदत द॒ध्नेद॒भि श्री॑णीतन ।
इन्दु॒मिन्द्रे॑ दधातन
namasedupa sīdata dadhnedabhi śrīṇītana |
indumindre dadhātana
अ॒मि॒त्र॒हा विच॑र्षणि॒ः पव॑स्व सोम॒ शं गवे॑ ।
दे॒वेभ्यो॑ अनुकाम॒कृत्
amitrahā vicarṣaṇiḥ pavasva soma śaṃ gave |
devebhyo anukāmakṛt
इन्द्रा॑य सोम॒ पात॑वे॒ मदा॑य॒ परि॑ षिच्यसे ।
म॒न॒श्चिन्मन॑स॒स्पति॑ः
indrāya soma pātave madāya pari ṣicyase |
manaścinmanasaspatiḥ
पव॑मान सु॒वीर्यं॑ र॒यिं सो॑म रिरीहि नः ।
इन्द॒विन्द्रे॑ण नो यु॒जा
pavamāna suvīryaṃ rayiṃ soma rirīhi naḥ |
indavindreṇa no yujā
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