अष्टम मण्डल

सूक्त 86: विश्वक अश्विनौ से पुत्र माँगते हैं

ऋषि: कृष्ण आङ्गिरसः, विश्वको वा कार्ष्णिः · देवता: अश्विनौ · छन्द: जगती

5 श्लोक · 86 में से 103

इस अध्याय में क्या होता है

विश्वक अश्विनौ से पुत्र माँगते हैं

यह सूक्त कृष्ण आङ्गिरस या उनके पुत्र विश्वक कार्ष्णि का है। अश्विनौ आश्चर्य कर्म करने वाले, सुख देने वाले वैद्य हैं। विश्वक सन्तान के लिए उन्हें पुकारते हैं, और हर मन्त्र एक ही विनती पर समाप्त होता है, हमें अपनी मित्रता से अलग मत करो, हमें मत छोड़ो। व्याकुल मन वाला तुम्हारी स्तुति ठीक कैसे करे? तुमने ही उसे कल्याण खोजने की बुद्धि दी। तुमने इस पुरुष को उसका खोया पुत्र विष्णापू लौटाया था। ऋषि धन जीतने वाले उस वीर को पुकारते हैं जिसकी कृपा पिता की तरह मधुर है। अन्तिम मन्त्र ऋत का गान है, ऋत से सविता ने परिश्रम किया, ऋत का शृङ्ग दूर तक फैला है।

86.1

उ॒भा हि द॒स्रा भि॒षजा॑ मयो॒भुवो॒भा दक्ष॑स्य॒ वच॑सो बभू॒वथु॑ः ।
ता वां॒ विश्व॑को हवते तनूकृ॒थे मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम्

ubhā hi dasrā bhiṣajā mayobhuvobhā dakṣasya vacaso babhūvathuḥ |
tā vāṃ viśvako havate tanūkṛthe mā no vi yauṣṭaṃ sakhyā mumocatam

86.2

क॒था नू॒नं वां॒ विम॑ना॒ उप॑ स्तवद्यु॒वं धियं॑ ददथु॒र्वस्य॑इष्टये ।
ता वां॒ विश्व॑को हवते तनूकृ॒थे मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम्

kathā nūnaṃ vāṃ vimanā upa stavadyuvaṃ dhiyaṃ dadathurvasyaiṣṭaye |
tā vāṃ viśvako havate tanūkṛthe mā no vi yauṣṭaṃ sakhyā mumocatam

86.3

यु॒वं हि ष्मा॑ पुरुभुजे॒ममे॑ध॒तुं वि॑ष्णा॒प्वे॑ द॒दथु॒र्वस्य॑इष्टये ।
ता वां॒ विश्व॑को हवते तनूकृ॒थे मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम्

yuvaṃ hi ṣmā purubhujemamedhatuṃ viṣṇāpve dadathurvasyaiṣṭaye |
tā vāṃ viśvako havate tanūkṛthe mā no vi yauṣṭaṃ sakhyā mumocatam

86.4

उ॒त त्यं वी॒रं ध॑न॒सामृ॑जी॒षिणं॑ दू॒रे चि॒त्सन्त॒मव॑से हवामहे ।
यस्य॒ स्वादि॑ष्ठा सुम॒तिः पि॒तुर्य॑था॒ मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम्

uta tyaṃ vīraṃ dhanasāmṛjīṣiṇaṃ dūre citsantamavase havāmahe |
yasya svādiṣṭhā sumatiḥ pituryathā mā no vi yauṣṭaṃ sakhyā mumocatam

86.5

ऋ॒तेन॑ दे॒वः स॑वि॒ता श॑मायत ऋ॒तस्य॒ शृङ्ग॑मुर्वि॒या वि प॑प्रथे ।
ऋ॒तं सा॑साह॒ महि॑ चित्पृतन्य॒तो मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम्

ṛtena devaḥ savitā śamāyata ṛtasya śṛṅgamurviyā vi paprathe |
ṛtaṃ sāsāha mahi citpṛtanyato mā no vi yauṣṭaṃ sakhyā mumocatam

पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)