बृह॒स्पति॑र्नयतु दु॒र्गहा॑ ति॒रः पुन॑र्नेषद॒घशं॑साय॒ मन्म॑ ।
क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः
bṛhaspatirnayatu durgahā tiraḥ punarneṣadaghaśaṃsāya manma |
kṣipadaśastimapa durmatiṃ hannathā karadyajamānāya śaṃ yoḥ
ऋषि: तपुमूर्धा बार्हस्पत्यः · देवता: बृहस्पतिः · छन्द: त्रिष्टुप्
3 श्लोक · 182 में से 191
तपुर्मूर्धा बार्हस्पत्य त्रिष्टुप् में बृहस्पति की स्तुति करते हैं। बृहस्पति हमें कठिन स्थानों से पार ले जाएँ और निन्दक की दुर्बुद्धि को उलट दें। हर मन्त्र एक ही पंक्ति पर समाप्त होता है: वे शाप को फेंक दें, दुर्मति को मारें, और यजमान को शान्ति और कल्याण दें। प्रयाज में नराशंस हमारी रक्षा करें, और आहुतियों में अनुयाज हमारे लिए शुभ हो। तपे हुए सिर वाले वे स्तुति से द्वेष करने वाले राक्षसों को जलाएँ, कि वे बाण से मारे जाएँ। ऋषि का अपना नाम तपुर्मूर्धा अन्तिम मन्त्र में देव की तपती शक्ति का नाम बन जाता है।
बृह॒स्पति॑र्नयतु दु॒र्गहा॑ ति॒रः पुन॑र्नेषद॒घशं॑साय॒ मन्म॑ ।
क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः
bṛhaspatirnayatu durgahā tiraḥ punarneṣadaghaśaṃsāya manma |
kṣipadaśastimapa durmatiṃ hannathā karadyajamānāya śaṃ yoḥ
नरा॒शंसो॑ नोऽवतु प्रया॒जे शं नो॑ अस्त्वनुया॒जो हवे॑षु ।
क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः
narāśaṃso no'vatu prayāje śaṃ no astvanuyājo haveṣu |
kṣipadaśastimapa durmatiṃ hannathā karadyajamānāya śaṃ yoḥ
तपु॑र्मूर्धा तपतु र॒क्षसो॒ ये ब्र॑ह्म॒द्विष॒ः शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ ।
क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः
tapurmūrdhā tapatu rakṣaso ye brahmadviṣaḥ śarave hantavā u |
kṣipadaśastimapa durmatiṃ hannathā karadyajamānāya śaṃ yoḥ
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