इन्द्र॒मिद्गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किण॑ः ।
इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत
indramidgāthino bṛhadindramarkebhirarkiṇaḥ |
indraṃ vāṇīranūṣata
ऋषि: मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः · देवता: इन्द्रः · छन्द: गायत्री
10 श्लोक · 7 में से 191
गाने वाले गीतों से, अर्चना करने वाले मन्त्रों से इन्द्र की स्तुति करते हैं, और वाणियाँ उन तक पहुँची हैं। इस गायत्री सूक्त में मधुच्छन्दा वैश्वामित्र उन्हें स्वर्णिम वज्रधारी कहते हैं। इन्द्र ने दूर तक देखने के लिए सूर्य को आकाश में चढ़ाया और गौओं के लिए पर्वत को तोड़ा। ऋषि बड़े और छोटे संग्रामों में उग्र इन्द्र से उग्र सहायता माँगते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वे अन्न का भण्डार हमारे लिए खोल दें। जैसे वृषभ झुण्ड को चलाता है, वैसे वे अपने ओज से जनों को प्रेरित करते हैं। पाँचों जनों के धन के एकमात्र स्वामी वही हैं। वे केवल हमारे हों।
इन्द्र॒मिद्गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किण॑ः ।
इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत
indramidgāthino bṛhadindramarkebhirarkiṇaḥ |
indraṃ vāṇīranūṣata
इन्द्र॒ इद्धर्यो॒ः सचा॒ सम्मि॑श्ल॒ आ व॑चो॒युजा॑ ।
इन्द्रो॑ व॒ज्री हि॑र॒ण्यय॑ः
indra iddharyoḥ sacā sammiśla ā vacoyujā |
indro vajrī hiraṇyayaḥ
इन्द्रो॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑स॒ आ सूर्यं॑ रोहयद्दि॒वि ।
वि गोभि॒रद्रि॑मैरयत्
indro dīrghāya cakṣasa ā sūryaṃ rohayaddivi |
vi gobhiradrimairayat
इन्द्र॒ वाजे॑षु नोऽव स॒हस्र॑प्रधनेषु च ।
उ॒ग्र उ॒ग्राभि॑रू॒तिभि॑ः
indra vājeṣu no'va sahasrapradhaneṣu ca |
ugra ugrābhirūtibhiḥ
इन्द्रं॑ व॒यं म॑हाध॒न इन्द्र॒मर्भे॑ हवामहे ।
युजं॑ वृ॒त्रेषु॑ व॒ज्रिण॑म्
indraṃ vayaṃ mahādhana indramarbhe havāmahe |
yujaṃ vṛtreṣu vajriṇam
स नो॑ वृषन्न॒मुं च॒रुं सत्रा॑दाव॒न्नपा॑ वृधि ।
अ॒स्मभ्य॒मप्र॑तिष्कुतः
sa no vṛṣannamuṃ caruṃ satrādāvannapā vṛdhi |
asmabhyamapratiṣkutaḥ
तु॒ञ्जेतु॑ञ्जे॒ य उत्त॑रे॒ स्तोमा॒ इन्द्र॑स्य व॒ज्रिण॑ः ।
न वि॑न्धे अस्य सुष्टु॒तिम्
tuñjetuñje ya uttare stomā indrasya vajriṇaḥ |
na vindhe asya suṣṭutim
वृषा॑ यू॒थेव॒ वंस॑गः कृ॒ष्टीरि॑य॒र्त्योज॑सा ।
ईशा॑नो॒ अप्र॑तिष्कुतः
vṛṣā yūtheva vaṃsagaḥ kṛṣṭīriyartyojasā |
īśāno apratiṣkutaḥ
य एक॑श्चर्षणी॒नां वसू॑नामिर॒ज्यति॑ ।
इन्द्र॒ः पञ्च॑ क्षिती॒नाम्
ya ekaścarṣaṇīnāṃ vasūnāmirajyati |
indraḥ pañca kṣitīnām
इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः ।
अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः
indraṃ vo viśvataspari havāmahe janebhyaḥ |
asmākamastu kevalaḥ
पाठ का स्रोत: Wikisource · CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription of a public-domain text)