सुनहु तात जेहि कारन आयउँ । सो सब भयउ दरस तव पायउँ ॥
देखि परम पावन तव आश्रम । गयउ मोह संसय नाना भ्रम ॥
sunahu tāta jehi kārana āyaum̐ | so saba bhayau darasa tava pāyaum̐ ||
dekhi parama pāvana tava āśrama | gayau moha saṃsaya nānā bhrama ||
6 श्लोक · 64 में से 130
गरुड़ भुशुण्डि से कहते हैं, तात, जिस कारण आया था वह आपके दर्शन से पूरा हो गया; आपका परम पावन आश्रम देखकर मोह, संशय और अनेक भ्रम मिट गए। अब अत्यन्त पवित्र श्रीराम-कथा आदर से सुनाइए। गरुड़ की विनम्र, सरल, प्रेम भरी और पवित्र वाणी सुनकर कौए के मन में बड़ा उत्साह हुआ और वह रघुपति की गुण-गाथा कहने लगा। भगवान शिव भवानी को क्रम बताते हैं। पहले भुशुण्डि ने अत्यन्त प्रेम से रामचरित-सरोवर का वर्णन किया। फिर नारद का अपार मोह, फिर रावण का अवतार, फिर प्रभु के अवतार की कथा, फिर मन लगाकर शिशु-चरित। फिर उन्होंने ऋषि का आगमन और श्री रघुवीर का विवाह कहा।
सुनहु तात जेहि कारन आयउँ । सो सब भयउ दरस तव पायउँ ॥
देखि परम पावन तव आश्रम । गयउ मोह संसय नाना भ्रम ॥
sunahu tāta jehi kārana āyaum̐ | so saba bhayau darasa tava pāyaum̐ ||
dekhi parama pāvana tava āśrama | gayau moha saṃsaya nānā bhrama ||
अब श्रीराम कथा अति पावनि । सदा सुखद दुख पुञ्ज नसावनि ॥
सादर तात सुनावहु मोही । बार बार बिनवउँ प्रभु तोही ॥
aba śrīrāma kathā ati pāvani | sadā sukhada dukha puñja nasāvani ||
sādara tāta sunāvahu mohī | bāra bāra binavaum̐ prabhu tohī ||
सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता । सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता ॥
भयउ तासु मन परम उछाहा । लाग कहइ रघुपति गुन गाहा ॥
sunata garur̤a kai girā binītā | sarala suprema sukhada supunītā ||
bhayau tāsu mana parama uchāhā | lāga kahai raghupati guna gāhā ||
प्रथमहिँ अति अनुराग भवानी । रामचरित-सर कहेसि बखानी ॥
पुनि नारद कर मोह अपारा । कहेसि बहुरि रावन अवतारा ॥
prathamahim̐ ati anurāga bhavānī | rāmacarita-sara kahesi bakhānī ||
puni nārada kara moha apārā | kahesi bahuri rāvana avatārā ||
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई । तब सिसु-चरित कहेसि मन लाई ॥
prabhu avatāra kathā puni gāī | taba sisu-carita kahesi mana lāī ||
बालचरित कहिँ बिबिध विधि, मन महँ परम उछाह ।
रिषि आगमन कहेसि पुनि, श्री रघुबीर बिबाह ॥
bālacarita kahim̐ bibidha vidhi, mana maham̐ parama uchāha |
riṣi āgamana kahesi puni, śrī raghubīra bibāha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0