पूँछ हीनबानर तहँ जाइहि । तब सठ निज नाथहि लइ आइहि ॥
जिन्ह के कीन्हसि बहुत बड़ाई । देखउँ मैं तिन्ह के प्रभुताई ॥
pūm̐cha hīnabānara taham̐ jāihi | taba saṭha nija nāthahi lai āihi ||
jinha ke kīnhasi bahuta bar̤āī | dekhaum̐ maiṃ tinha ke prabhutāī ||
6 श्लोक · 25 में से 60
रावण कहता है, पूँछ कटा बन्दर लौटेगा तो अपने स्वामी को ले आएगा, मैं उसकी प्रभुता देखूँगा जिसकी इसने बड़ाई की। कपि मन में मुस्कुराते हैं, जान लेते हैं कि सरस्वती सहायक हुई हैं। नगर में कपड़ा, घी, तेल कुछ नहीं बचता, क्योंकि कपि खेल में पूँछ बढ़ाते जाते हैं। तमाशा देखने आए नगरवासी लातें मारते हैं, हँसते हैं, ढोल बजाते और तालियाँ पीटते हैं, नगर में घुमाकर पूँछ में आग लगा देते हैं। तब हनुमान बहुत छोटे होकर बन्धन से निकल सोने की अटारियों पर चढ़ जाते हैं और राक्षसियाँ डर जाती हैं। हरि की प्रेरणा से उनचासों पवन चलते हैं। कपि अट्टहास करके गरजते हैं और बढ़कर आकाश छूने लगते हैं।
पूँछ हीनबानर तहँ जाइहि । तब सठ निज नाथहि लइ आइहि ॥
जिन्ह के कीन्हसि बहुत बड़ाई । देखउँ मैं तिन्ह के प्रभुताई ॥
pūm̐cha hīnabānara taham̐ jāihi | taba saṭha nija nāthahi lai āihi ||
jinha ke kīnhasi bahuta bar̤āī | dekhaum̐ maiṃ tinha ke prabhutāī ||
बचन सुनत कपि मन मुसुकाना । भइ सहाय सारद मैं जाना ॥
जातुधान सुनि रावन बचना । लागे रचइ मूढ़ सोइ रचना ॥
bacana sunata kapi mana musukānā | bhai sahāya sārada maiṃ jānā ||
jātudhāna suni rāvana bacanā | lāge racai mūr̤ha soi racanā ||
रहा न नगर बसन घृत तेला । बाढ़ी पूँछि कीन्ह कपि खेला ॥
कौतुक कहँ आये पुर-बासी । मारहिँ चरन करहिँ बहु हाँसी ॥
rahā na nagara basana ghṛta telā | bār̤hī pūm̐chi kīnha kapi khelā ||
kautuka kaham̐ āye pura-bāsī | mārahim̐ carana karahim̐ bahu hām̐sī ||
बाजहिँ ढोल देहिँ सब तारी । नगर, फेरि पुनि पूँछि प्रजारी ॥
पावक जरत देखि हनुमन्ता । भयउ परम लघुरूप तुरन्ता ॥
bājahim̐ ḍhola dehim̐ saba tārī | nagara, pheri puni pūm̐chi prajārī ||
pāvaka jarata dekhi hanumantā | bhayau parama laghurūpa turantā ||
निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारीं । भई सभीत निसाचर-नारीं ॥
nibuki car̤heu kapi kanaka aṭārīṃ | bhaī sabhīta nisācara-nārīṃ ||
हरि-प्रेरित तेहि अवसर, चले मरुत उनचास ।
अट्टहास करि गर्जा, कपि बढि लाग अकास ॥
hari-prerita tehi avasara, cale maruta unacāsa |
aṭṭahāsa kari garjā, kapi baḍhi lāga akāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0