अतिसय प्रीति देखि रघुराई । लीन्हे सकल बिमान चढ़ाई ॥
मन महँ बिप्र चरन सिर नावा । उत्तर दिसिहि बिमान चलायो ॥
atisaya prīti dekhi raghurāī | līnhe sakala bimāna car̤hāī ||
mana maham̐ bipra carana sira nāvā | uttara disihi bimāna calāyo ||
8 श्लोक · 119 में से 121
उनकी अतिशय प्रीति देखकर रघुराज सबको विमान पर चढ़ा लेते हैं। मन में ब्राह्मणों के चरणों में सिर नवाकर वे विमान उत्तर दिशा की ओर चलाते हैं। ऊँचे, मनोहर सिंहासन पर प्रभु सीता सहित विराजते हैं, मानो मेरु के शिखर पर बिजली सहित बादल हो। देवता फूल बरसाते हैं; शीतल हवा चलती है और चारों ओर शुभ शकुन होते हैं। रघुवीर कहते हैं: सीता, रणभूमि देखो। यहाँ लक्ष्मण ने इन्द्रजीत को मारा। हनुमान और अंगद के मारे बड़े-बड़े निशाचर यहाँ पड़े हैं। यहीं देवताओं और मुनियों को दुख देने वाले कुम्भकर्ण और रावण मारे गए। यहाँ मैंने सेतु बाँधा और सुखधाम शिव की स्थापना की। सीता सहित कृपानिधि शम्भु को प्रणाम करते हैं। फिर वन में जहाँ-जहाँ निवास और विश्राम किया, वे सब स्थान नाम लेकर जानकी को दिखाते हैं।
अतिसय प्रीति देखि रघुराई । लीन्हे सकल बिमान चढ़ाई ॥
मन महँ बिप्र चरन सिर नावा । उत्तर दिसिहि बिमान चलायो ॥
atisaya prīti dekhi raghurāī | līnhe sakala bimāna car̤hāī ||
mana maham̐ bipra carana sira nāvā | uttara disihi bimāna calāyo ||
चलत बिमान कोलाहल होई । जय रघुबीर कहइ सब कोई ॥
सिंहासन अति उच्च मनोहर । श्री समेत प्रभु बैठै ता पर ॥
calata bimāna kolāhala hoī | jaya raghubīra kahai saba koī ||
siṃhāsana ati ucca manohara | śrī sameta prabhu baiṭhai tā para ||
राजत राम सहित भामिनी । मेरु-सृङ्ग जनु घन दामिनी ॥
रुचिर बीमान चलेउ अति आतुर । कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर ॥
rājata rāma sahita bhāminī | meru-sṛṅga janu ghana dāminī ||
rucira bīmāna caleu ati ātura | kīnhī sumana bṛṣṭi haraṣe sura ||
परम सुखद चलि त्रिबिधि बयारी । सागर सर सरि निर्मल बारी ॥
सगुन होहिं सुन्दर चहुँ पासा । मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा ॥
parama sukhada cali tribidhi bayārī | sāgara sara sari nirmala bārī ||
saguna hohiṃ sundara cahum̐ pāsā | mana prasanna nirmala nabha āsā ||
कह रघुबीर देखु रन सीता । लछिमन इहाँ हतेउ इंद्रजीता ॥
हनुमान अङ्गद के मारे । रन-महि परे निसाचर भारे ॥
kaha raghubīra dekhu rana sītā | lachimana ihām̐ hateu iṃdrajītā ||
hanumāna aṅgada ke māre | rana-mahi pare nisācara bhāre ||
कुम्भकरन रावन दोउ आई । इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई ॥
kumbhakarana rāvana dou āī | ihām̐ hate sura muni dukhadāī ||
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख-धाम ।
सीता सहित कृपानिधि, सम्भुहि कीन्ह प्रनाम ॥
ihām̐ setu bām̐dhyo aru thāpeum̐ siva sukha-dhāma |
sītā sahita kṛpānidhi, sambhuhi kīnha pranāma ||
जहँ जहँ कृपासिन्धु बन कीन्ह बास बिश्राम ।
सकल देखाये जानकिहि, कहे सबन्हि के नाम ॥
jaham̐ jaham̐ kṛpāsindhu bana kīnha bāsa biśrāma |
sakala dekhāye jānakihi, kahe sabanhi ke nāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0