तदपि करब मैं काज तुम्हारा । स्रुति कह परम-धरम-उपकारा ॥
पर हित लागि तजइ जो देही । सन्तत सन्त प्रसंसहिँ तेही ॥
tadapi karaba maiṃ kāja tumhārā | sruti kaha parama-dharama-upakārā ||
para hita lāgi tajai jo dehī | santata santa prasaṃsahim̐ tehī ||
6 श्लोक · 84 में से 361
कामदेव बोला, फिर भी मैं तुम्हारा काम करूँगा, क्योंकि वेद परोपकार को परम धर्म कहते हैं। ऐसा कहकर, सबको सिर नवाकर, वह फूलों का धनुष लेकर सहायकों सहित चला। चलते हुए उसने मन में सोचा कि शिव के विरोध से मेरा मरण निश्चित है। तब उसने अपना प्रभाव फैलाकर सारे संसार को वश में कर लिया। मीनकेतु के क्रोध करते ही क्षण भर में वेदों की सब मर्यादाएँ मिट गईं। ब्रह्मचर्य, संयम, धर्म, ज्ञान, जप, योग और वैराग्य, विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गई और सद्ग्रन्थ रूपी पर्वत की कन्दराओं में जा छिपी। जगत में खलबली मच गई। जगत के सब चर अचर, नर और नारी, अपनी मर्यादा छोड़कर काम के वश हो गए।
तदपि करब मैं काज तुम्हारा । स्रुति कह परम-धरम-उपकारा ॥
पर हित लागि तजइ जो देही । सन्तत सन्त प्रसंसहिँ तेही ॥
tadapi karaba maiṃ kāja tumhārā | sruti kaha parama-dharama-upakārā ||
para hita lāgi tajai jo dehī | santata santa prasaṃsahim̐ tehī ||
अस कहि चलेउ सबहि सिर नाई । सुमन धनुष कर सहित सहाई ॥
चलत मार अस हृदयँ बिचारा । सिव-बिरोध ध्रुव मरन हमारा ॥
asa kahi caleu sabahi sira nāī | sumana dhanuṣa kara sahita sahāī ||
calata māra asa hṛdayam̐ bicārā | siva-birodha dhruva marana hamārā ||
तब आपन प्रभाव विस्तारा । निज बस कीन्ह सकल संसारा ॥
कोपेउ जबहिँ बारिचर-केतू । छन महँ मिटे सकल स्रुति-सेतू ॥
taba āpana prabhāva vistārā | nija basa kīnha sakala saṃsārā ||
kopeu jabahim̐ bāricara-ketū | chana maham̐ miṭe sakala sruti-setū ||
ब्रह्मचर्ज ब्रत सञ्जम नाना । धीरज धरम ज्ञान बिज्ञाना ॥
सदाचार जप जोग बिरागा । सभय बिबेक कटक सब भागा ॥
brahmacarja brata sañjama nānā | dhīraja dharama jñāna bijñānā ||
sadācāra japa joga birāgā | sabhaya bibeka kaṭaka saba bhāgā ||
भागेउ बिबेक सहाय सहित सो सुभट सञ्जुग-महि मुरे ।
सदग्रन्थ-पर्बत-कन्दरन्हि महँ, जाई तेहि अवसर दुरे ॥
होनिहार का करतार को रखवार जग खरभर परा ।
दुइ माथ केहि रतिनाथ जेहि कहँ, कोपि कर धनु-सर धरा ॥
bhāgeu bibeka sahāya sahita so subhaṭa sañjuga-mahi mure |
sadagrantha-parbata-kandaranhi maham̐, jāī tehi avasara dure ||
honihāra kā karatāra ko rakhavāra jaga kharabhara parā |
dui mātha kehi ratinātha jehi kaham̐, kopi kara dhanu-sara dharā ||
जे सजीव जग अचर चर अचर, नारि पुरुष अस नाम ।
ते निज निज मरजाद तजि, भये सकल बस काम ॥
je sajīva jaga acara cara acara, nāri puruṣa asa nāma |
te nija nija marajāda taji, bhaye sakala basa kāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0